लिट्टे मसले पर वाइको की याचिका पर फैसला सुरक्षित
यद्यपि वाइको ने अपने जिस आवेदन में सरकार के 14 मई की अधिसूचना को चुनौती दी थी, उस आवेदन पर एक पक्ष के रूप में सुनवाई होगी। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने प्रतिबंध के परीक्षण के लिए एक सदस्यीय न्यायाधिकरण का गठन किया था। लिट्टे पर यह प्रतिबंध अनधिकृत गतिविधि निरोधक कानून-1967 के तहत लागू है।
वाइको ने अपने आवेदन में कहा है कि एमडीएमके लिट्टे समर्थक पार्टी के रूप में बताया गया है, और प्रतिबंध के लिए यह एक कारण के रूप में बताया गया है। इसलिए तमिलों की ओर से वह उनकी बात रखने के हकदार हैं। वाइको ने कहा कि लिट्टे एक मात्र ऐसा संगठन रहा है जिसने पीड़ित तमिलों के पक्ष में आवाज उठाया है।
वाइको ने कहा, "मैं प्रभावित हुआ हूं। कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब हमने लिट्टे का समर्थन किया है तो हमें पकड़ा गया है और प्राताड़ित किया गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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