राष्ट्रमंडल खेल : पटरी पर आई गाड़ी, खिलाड़ियों का आगमन शुरू (राउंडअप)

कई दिनों की अनिश्चितता के बाद इंग्लैंड के 22 खिलाड़ियों का पहला दस्ता शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गया। इसमें हॉकी और लॉन बाल की टीमें शामिल हैं। इंग्लैंड के 551 खिलाड़ियों का पूरा दस्ता अगले कुछ दिनों में दिल्ली पहुंच जाएगा। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

आयोजन समिति के लिए प्रसन्नता की बात यह हुई है कि राष्ट्रमंडल खेल परिसंघ (सीजीएफ) के अध्यक्ष माइक फेनेल ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेल्स की टीमें खेलों में हिस्सा लेंगी।

खेलों की प्रगति की समीक्षा करने गुरुवार को दिल्ली पहुंचे फेनेल ने कहा, "मैं इन खबरों के साथ दिल्ली पहुंच कर निश्चित रूप से खुश हूं कि आस्टेलिया ने अपने खिलाड़ियों को दिल्ली भेजने की तैयारी कर ली है और गुरुवार को इस बात की पुष्टि हो गई कि इंग्लैंड और वेल्स की टीमें थोड़े ही समय में दिल्ली के रास्ते में होंगी।"

फेनेल ने कहा, "राष्ट्रमंडल देशों के कई सारे खिलाड़ी पहले ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं।"

फेनेल ने कहा कि उन्हें पता चला है कि खेलगांव में काफी सुधार हुआ है। पिछले सप्ताह खेलगांव को गंदा और रहने के अयोग्य कहा गया था।

खेलगांव में गंदगी को देखते हुए ही कई देशों ने अपनी टीम की रवानगी टाल दी थी और कई खिलाड़ियों ने दिल्ली आने से इंकार कर दिया था।

फेनेल ने कहा, "पिछली रात मेरे सीईओ माइक हूपर ने मुझे बताया कि खेलगांव में काफी प्रगति हुई है। स्थिति को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा अतिरिक्त पर्याप्त संसाधनों को वहां लगाया गया है।"

एक अधिकारी ने कहा कि सफाई अभियान के तहत एक गैर सरकारी संगठन के सहयोग से नगर प्रशासन ने लगभग 100 अवारा कुत्तों को खेलगांव से तथा अन्य आयोजन स्थलों से पकड़ कर बाहर कर दिया है।

फेनेल के अनुसार, "हमें खिलाड़ियों और उनके सहायक कर्मचारियों की बेहतरी के लिए हमें हर हाल में उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।"

इस बीच इंग्लैंड के खिलाड़ियों का 22 सदस्यीय दल दिल्ली पहुंचने के बाद फिलहाल होटल में रुका हुआ है। इंग्लैंड के मिशन प्रमुख क्रैग हंटर ने कहा कि खेल गांव के पूरी तरह तैयार होने तक खिलाड़ी होटल में ही रहेंगे।

समाचार पत्र द डेली टेलीग्राफ ने हंटर के हवाले से लिखा है, "हम अपने खिलाड़ियों को स्थानीय होटलों में रखेंगे।"

हंटर ने कहा है, "मैं नहीं चाहता कि एक बार उन्हें खेल गांव में ले जाया जाए, फिर वहां से बाहर ले जाया जाए। हम चाहते हैं कि जब खेल गांव पूरी तरह तैयार हो जाए तब खिलाड़ी वहां जाएं।"

इस बीच न्यूजीलैंड के एक प्रमुख साइक्लिस्ट सहित इंग्लैंड के शीर्ष चार साइक्लिस्टों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत नहीं करने की घोषणा की है।

न्यूजीलैंड के साइक्लिस्ट ग्रेग हेंडर्सन अपने देश के पहले एथलीट हैं जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भाग नहीं लेने की घोषणा की है।

यद्यपि न्यूजीलैंड की ओलम्पिक समिति (एनजेडओसी) ने खिलाड़ियों को दिल्ली भेजने का फैसला किया है। एनजेडओसी के अध्यक्ष माइक स्टेनली और महासचिव बैरी मेस्टर ने राष्ट्रमंडल खेलों में न्यूजीलैंड की टीम के शामिल होने के फैसले की घोषणा की।

लंदन में गुरुवार की रात वेल्स के रहने वाले विश्व और ओलम्पिक चैम्पियन साइकलिस्ट गेरैंट थॉमस ने घोषणा की कि डेंगू और खेल गांव की खराब स्थिति के कारण वह प्रतिस्पर्धा से अपना नाम वापस ले रहे हैं।

थॉमस के अलावा पीटर केनॉग और इंग्लैंड के बेन स्विफ्ट और इयान स्टैनार्ड ने दिल्ली में स्वास्थ्य को खतरा बताते हुए नाम वापस ले लिया है।

थॉमस ने कहा, "यह एक निराशाजनक फैसला है, लेकिन वहां स्वास्थ्य को खतरा पैदा होने की आशंका है।" केनॉट ने भी ऐसी ही प्रतिक्रिया दी है।

कनाडा ने भी राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों को लेकर संतुष्टि जाहिर करते हुए सभी कार्यक्रमों के निर्धारित समय पर आयोजित होने की संभावना जताई है। कनाडा ने बुधवार को अपने एथलीटों की रवानगी टाल दी थी।

टोरंटो के स्थानीय समाचार चैनल सीटीवी के मुताबिक कनाडा के एथलीट रविवार को दिल्ली पहुंचेंगे।

कनाडा में राष्ट्रमंडल खेलों के निदेशक स्कॉट स्टीवेंसन के हवाले से चैनल ने कहा, "यदि ऐसी ही प्रगति होती रहे तो राष्ट्रमंडल खेल बिना बाधा के आयोजित होंगे।"

स्टीवेंसन ने कहा, "हम दोबारा अपना ध्यान खेल की तरफ लगा रहे हैं।" कानाडा में राष्ट्रमंडल खेलों के अध्यक्ष एंड्र पाइप ने प्रधानमंत्री मनमोनहन सिंह द्वारा इस मुद्दे पर हस्तक्षेप किए जाने का स्वागत किया है।

कनाडा ने गुरुवार को कहा था कि उसकी महिला हॉकी टीम के साथ ही एथलीटों की दिल्ली रवानगी को टाल दी गई है क्योंकि खेल गांव की हालत रहने लायक नहीं है।

उधर, आस्ट्रेलियाई ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष जॉन कोट्स ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत को नहीं मिलनी चाहिए थी।

आस्ट्रेलिया की समाचार एजेंसी 'एएपी' के मुताबिक कोट्स ने कहा, "स्पष्ट रूप से कहा जाए तो भारत को खेलों की मेजबानी नहीं मिलनी चाहिए थी।"

उन्होंने कहा, "राष्ट्रमंडल खेल संघ (सीजीएफ) के पास संसाधनों की कमी एक समस्या है। इसके पास आयोजन स्थलों पर काम की प्रगति का मूल्यांकन करने की क्षमता उपलब्ध नहीं है जो कि ओलम्पिक समिति के पास उपलब्ध है।"

भारत की तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए राष्ट्रमंडल खेल संघ के पास केवल पांच कर्मचारी हैं। जबकि दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (आईओसी) के पास इसके लिए 400 से ज्यादा कर्मचारी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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