विवादों में घिरा माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय

भोपाल 24 सितम्बर,(आईएएनएस)। देश का प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय विवादों में लगातार बना हुआ है। पिछले आठ माह में यहां चार आंदोलन हो चुके हैं और छात्रों तथा शिक्षकों के एक बड़े हिस्से में विश्वविद्यालय के कुलपति बृजकिशोर कुठियाला की कार्यशैली को लेकर जबरदस्त असंतोष है।

गौरतलब है कि गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में तोड़ फोड़ हुई थी जिसके बाद कुछ छात्रों के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने मामले दर्ज किए हालांकि छात्रों का कहना है कि इस घटना में बाहरी तत्वों का हाथ है और उन्हें फंसाया जा रहा है। विवादों का यह दौर कुलपति के पद पर कुठियाला के 19 जनवरी 2010 को आसीन होने के बाद शुरू हुआ। शुरूआती महीनों में तो सब कुछ ठीक था लेकिन जुलाई का माह आते आते विश्ववि़द्यालय की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे।

पहले तो ताजा शिक्षा सत्र शुरू होने में एक माह का विलम्ब हुआ। इसके बाद कुठियाला की कार्यशैली से नारज शिक्षक व अन्य कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इसके बाद कुलपति ने बैठक बुलाकर अपने व्यवहार पर खेद जताया। इस बीच विश्वद्यिालय के मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्रों ने भी तथाकथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके बाद छात्रों ने भी कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोला।

सितम्बर में विश्वविद्यालय के हालात कुछ सुधरे ही थे कि एक महिला शिक्षिका ने नियमित न किए जाने सहित कार्य स्थल पर प्रताड़ना का आरेाप लगाते हुए राज्य महिला आयोग में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पी. पी. सिंह के खिलाफ शिकायत की। इस शिकायत पर आयोग ने सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। सिंह को 28 सितम्बर को अपना पक्ष रखना था उससे पहले ही विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने उन्हे विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन की इस कार्रवाई से छात्र भड़क गए। उनका आरोप है कि कुलपति ने बगैर दोषी सिद्ध हुए ही सिंह को पद से हटा दिया। छात्र आंदोलित हैं और उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटे से छात्र-छात्राएं खुले आसमान के नीचे अनशन पर बैठे है। कुठियाला और कुलसचिव ने अनशन समाप्त करने की अपील की मगर छात्र, सिंह की बहाली से कम पर अनशन खत्म करने को तैयार नहीं है।

विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवादों और पिछले कुछ समय में हुए चार आंदोलनों के संदर्भ में आईएएनएस ने कुलपति कुठियाला से पूछा तो उनका कहना था कि वह खुद नहीं समझ पा रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। उन्होंने कहा छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों में असंतोष की वजह वह खुद खोज रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सिंह को विभागाध्यक्ष पद से केवल अस्थाई तौर पर हटाया गया है। राज्य सरकार के जनसंपर्क सचिव राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में चल रहे विवाद को लेकर सरकार गंभीर है और उस पर नजर रखे हुए है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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