हुसैन की कविता की पांडुलिपि की बिक्री
हुसैन ने कागज के चार पन्नों पर काले रंग की स्याही से यह कविता लिखी है जो उनके भावनात्मक उद्गारों को उभारती है। 90 के दशक में लिखी गई इस कविता की पांडुलिपि का मूल्य 2.5 लाख रुपये है।
शो की आयोजक गार्गी सेठ ने आईएएनएस से कहा, "यह कविता एक व्यक्ति के पास थी, प्रदर्शनी के लिए उन्हीं से इसे लिया गया। उनका इसके कुछ प्रिंट जारी करने का इरादा था लेकिन किन्हीं कारणों से यह प्रिंट नहीं हो सकी।"
उन्होंने कहा कि यह भारत में यह इस कविता की अकेली प्रति है।
हुसैन इसी 17 सितम्बर को 95 वर्ष के हुए हैं। उन्हें अपने काम के बीच कविताएं लिखते रहने के लिए जाना जाता है। काव्य के प्रति उनके लगाव के चलते ही उन्होंने गीतकार जावेद अख्तर के कविता संग्रह 'तरकश' के लिए 16 पेंटिंग्स बनाई थीं।
हुसैन इस समय दोहा में हैं और उनकी कला यात्रा अनवरत जारी है।
प्रदर्शनी में 70 कलाकृतियां पेश की गई हैं। इनमें मूर्तियां और अन्य प्रकार की कलाकृतियां भी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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