जमुना देवी का निधन, मप्र में राजकीय शोक(लीड 1)
वह कुछ समय से बीमार थीं। गुरुवार रात उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई थी। शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली ।
जमुना के निधन को राज्य के लिए अपूर्णीय क्षति बताते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने 1952 से विभिन्न पदों पर रहते हुए कमजोर, गरीब, जनजातीय लोगों और महिलाओं के हित की लड़ाई लड़ी। राज्य में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
चौहान ने जमुना के निधन पर तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। इंदौर में शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनकी अन्त्येष्टि की जाएगी। इस दिन प्रदेश मे अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री ने 25 सितम्बर से शुरू होने वाले सेवा गारंटी अधिनियम के कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया है।
उनके निधन से राज्य में शोक की लहर व्याप्त है। उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा,"जमुना देवी बेबाक नेता थीं और उन्होंने जनजातीय वर्ग की पूरे जीवन लड़ाई लड़ी। उनकी किसी अन्य नेता से तुलना नहीं की जा सकती।" नगरीय प्रशासन मत्री बाबूलाल गौर, सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ,विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता चौधरी राकेश सिंह ने शोक जताया है।
मध्य प्रदेश में जमुना की पहचान जनजातीय वर्ग की नेता के तौर पर रही है और उन्होंने जनजातीय वर्ग के हित की लम्बी लड़ाई लड़ी है। वह 1952 से सक्रिय राजनीति में रहते हुए विधायक, सांसद, मंत्री, उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों रहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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