दो परिवारों ने कायम की साम्प्रदायिक एकता की मिसाल (चित्र सहित)

मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ब्लॉक में एक छोटा-सा गांव गोना है, जहां राजेश धीमान का हिंदू परिवार एक कमरे व एक बरामदे वाले पुराने मकान में किराए पर रहता है। इस कमरे की लम्बाई-चौड़ाई 18-18 फुट है। इसी कमरे में काफी समय से इलियास का मुस्लिम परिवार भी साथ रहता है। दोनों परिवारों के बीच न ही कोई मजहब की दीवार है और न ही कोई पर्दा।

परिवार के मुखिया राजेश धीमान का कहना है कि इलियास की पत्नी रूबीना और उनके बच्चे परिवार के सदस्यों की तरह साथ रहते हैं। उन्होंने कभी यह नहीं समझा कि कौन हिंदू और कौन मुसलमान है। इलियास का भी यही कहना है कि वह राजेश की पत्नी मुनेश को अपनी आपा की तरह मानते हैं। इससे भी बढ़कर इन परिवारों में जो प्यार है, वह उनके खाने में भी झलकता है।

दोनों परिवारों का जब खाना बनता है तो एक ही परात में दोनों का आटा गुथा जाता है और दोनों ही परिवारों का चूल्हा एक ही होता है। सभी साथ बैठकर खाना खाते हैं। दोनों ही परिवार आपस में खाद्य सामग्री जुटाने में सहयोग करते हैं, लेकिन पिछले कई सालों से इनका चूल्हा कभी भी अलग नहीं हुआ।

इन दोनों परिवारों के बीच साम्प्रदायिक और पारिवारिक एकता का पता प्रशासन को उस समय लगा जब मुनेश ने इंदिरा आवास की मांग की। उसने बताया कि उसका और रूबीना का पति राजमिस्त्री का कार्य करते हैं। दोनों के पास अपने मकान नहीं हैं और दोनों ही परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।

जनपद के जिलाधिकारी संतोष यादव भी इन दोनों परिवारों की बीच इस मिसाल भरे रिश्ते को हिंदू-मुस्लिम एकता का सशक्त उदाहरण मानते हैं। मकान प्राप्त करने के आवेदन की जांच के सिलसिले में गांव में पहुंचे ग्राम्य विकास अभिकरण के अधिकारी एस़ के. पाल और ग्रामीण सलीम तथा अध्यापक इस्लाम का भी यही कहना है कि जब इंसान के खून के रंग नहीं बदलते तो मजहब के नाम पर समाज को बांटना फिजूल है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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