भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाना चाहता है अमेरिका
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी की अगले सप्ताह प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिका ने कहा है कि वह भारत के साथ अपने सैन्य संबंधों का विस्तार करना चाहता है।
एंटनी की 27 से 28 सितम्बर की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा के सम्बंध में पूछे जाने पर अमेरिकी रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, "पिछले साल भारत की मेरी यात्रा काफी अच्छी रही थी इस दौरान मैंने रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी।"
उन्होंने कहा, "हम अपने इन संबंधों को विस्तार देना चाहते हैं जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद है लेकिन मुझे लगता है कि हम आपसी सबंधों, आदान-प्रदान और रिश्तों में मजबूती के अन्य रास्तों की भी तलाश करेगें।"
गेट्स ने इस बात का भी संकेत दिया कि वह एंटनी से भारतीय वायुसेना के लिए 9.11 अरब डॉलर की कीमत के 126 लड़ाकू विमानों के सौदे के बारे में भी बातचीत करेंगे।
भारत की इस बड़ी रक्षा खरीद के लिए छह लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव में से अमेरिका के एफ-16एन और एफ ए-18 आईए विमान शामिल हैं। भारत को प्रस्तावित किए गए अन्य विमान द साब ग्रिपेन, यूरोफाइटर, टायफून, डेसाल्ट रफेल और मिकयांग मिग-35 हैं।
इस सौदे के संबंध में उन्होंने कहा, "मुझे इस बात का विश्वास है कि नए आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। हम संभवत: इस सबंध में भी बात करेंगे।"
उच्च प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों के दोहरे उपयोग पर अमेरिका की पाबंदी के संबंध में पूछे जाने पर गेट्स ने कहा कि यह मुद्दा उनकी प्राथमिकता में है और वह इन प्रतिबंधों को हटाने पर विचार करेंगे।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह मुद्दा हमारी प्राथमिकता है, खासकर आयात-निर्यात या निर्यात प्रतिबंधों का और मेरा विचार इन निर्यात प्रतिबंधों को खत्म करने का है। इससे अमेरिकी कंपनियों को ऐसे उत्पाद विदेशों में बेचने का मौका मिलेगा जिनकी प्रौद्योगिकी जटिल नहीं है।
गेट्स ने कहा, "इसलिए मैं सोचता हूं कि भारत एक देश के तौर पर हमारी प्राथमिकता सूची में है और मैं इस तरह के प्रतिबंधों को हटाने का विचार रखता हूं।"
गेट्स के साथ संवाददाता सम्मेलन को संयुक्त रूप से संबोधित कर रहे अमेरिका के चीफ्स ऑफ स्टॉफ के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन ने कहा, "भारत के साथ हमारे सैन्य सहयोग में तेजी से वृद्धि हो रही है।"
उन्होंने कहा, "हम इन संबंधों और अपनी सेवाओं के प्रति प्रतिबद्ध हैं। मैं हाल ही में भारत गया था, हमारे लिए इन संबंधों का महत्व अन्य ऐतिहासिक संबंधों की तरह ही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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