अमेरिका ने रची थी 9/11 हमले की साजिश : अहमदीनेजाद (लीड-1)
वेबसाइट 'न्यूयार्क टाइम्स डॉट कॉम' के अनुसार ईरानी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कहा कि 9/11 के हमले के पीछे तीन कहानियां थीं। इनमें एक कहानी यह भी थी कि अमेरिकी सरकार के अंदर के कुछ लोगों ने लड़खड़ाती अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए, मध्यपूर्व पर अपनी पकड़ व्यवस्थित करने तथा इजरायल को बचाने के लिए इस हमले की साजिश रची।
अहमदीनेजाद के इस बयान के बाद कम से कम 33 देशों के प्रतिनिधि सभा कक्ष से उठ कर चले गए। इनमें अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कोस्टा रिका, यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि शामिल थे।
अहमदीनेजाद के इस बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी मिशन ने तत्काल बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बयान में कहा गया है, "ईरानी जनता की आकांक्षाओं और सद्भावनाओं को प्रस्तुत करने की बजाए अहमदीनेजाद ने एक बार फिर घृणित साजिश की कहानियों और यहूदी विरोधी जज्बातों को हवा दी है जो घिनौनी और भ्रामक हैं।"
अहमदीनेजाद ने कहा कि आतंकियों ने अमेरिकी सुरक्षा को भेदा तो उसके लिए वहां की सुरक्षा जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने हमला जरूर किया, लेकिन अमेरिकी सरकार ने उस स्थिति का लाभ उठाया। अहमदीनेजाद ने यह सुझाव तक दे डाला कि सच्चाई का पता लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक तथ्यान्वेषी समिति गठित करे।
उधर, यूरोपीय संघ ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के 'अनुचित' और अस्वीकार्य' दावों की वजह से उसके 27 सदस्यों ने उनके भाषण का बहिष्कार किया।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यूरोपीय संघ की विदेशी मामलों की वरिष्ठ प्रतिनिधि कैथरीन एश्टन ने एक बयान जारी कर कहा कि अहमदीनेजाद का वक्तव्य अनुचित और अस्वीकार्य था। यही वजह है कि यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल से बहिर्गमन किया।
एश्टन ने 9/11 के हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इन हमलों में 2700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
अहमदीनेजाद ने कहा कि इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व में हुए अभियानों में मारे गए हजारों लोगों के सामने यह आंकड़ा नगण्य है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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