'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में पत्रकारों को राहत
पत्रकार अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस. एन. ढींगरा ने कहा, "याचिका दायर करने वालों पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप लगाना न्याय का उपहास करने जैसा होगा।"
न्यायमूर्ति ढींगरा ने कहा, "इससे देशवासी संविधान में प्रदत्त कर्तव्यों का पालन करने के प्रति निरुत्साहित हो सकते हैं।"
इस स्टिंग के बाद संसद के दोनों सदनों की जांच समिति ने लोकसभा के 10 और राज्यसभा के एक सांसद को निलंबित करने की अनुशंसा की थी।
जांच समिति की सिफारिशों में स्टिंग ऑपरेशन में बिचौलियों की भूमिका की जांच करने की अनुशंसा भी की गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने बहल, राज और टीवी चैनल 'आज तक' के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
प्राथमिकी भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 12 और 13 एवं भारतीय दण्ड संहिता की षडयंत्र से निपटने की धारा 120 बी के तहत दर्ज की गई थी।
याचिकाकर्ताओं के वकील पी. के. दुबे ने न्यायालय से कहा कि स्टिंग ऑपरेशन देश हित में किया गया था और इसमें कोई निजी हित शामिल नहीं है।
दुबे ने कहा, "सरकार ने सांसदों को बचाने और मामले को खत्म करने के लिए पत्रकारों को आरोपी बनाया है। पत्रकार इस मामले में गवाह हैं और पुलिस ने दबाव में उनके खिलाफ कार्रवाई की है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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