भारतीय आईटी कंपनियां यूरोप, एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर ध्यान देंगी
नई दिल्ली, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अगले कुछ महीनों में भारी स्थिरता आ सकती है। अमेरिका में ऑउटसोर्सिग के खिलाफ अभियान के चलते भारत में इस क्षेत्र की मझौली कंपनियों को विकास दर बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
वैश्विक परामर्श संस्था डिलायट टच के वरिष्ठ निदेशक पी. एन. सुदर्शन ने एक आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "हमें लगता है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई विलय और अधिग्रहण होंगे। भारतीय कंपनियों के अलावा विदेशी कंपनियों के साथ भी समझौते होंगे। मध्यम आकार की कंपनियों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण होगा।"
उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिग के लिए भारतीय कंपनियों का ध्यान आने वाले महीनों में यूरोप और एशिया प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा।
सुदर्शन ने कहा, "अब बाजार काफी विस्तृत है। जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों के अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में अच्छे अवसर मौजूद हैं। ऑउटसोर्सिग कंपनियां विकास दर बनाए रखने के लिए अपनी आय के क्षेत्रों का विस्तार करेंगी।"
करीब 50 अरब डॉलर के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की 60 प्रतिशत आय अमेरिका से होती है। करीब 20 प्रतिशत आय यूरोप और बाकी 20 प्रतिशत बाकी विश्व से होती है।
यूरोप में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को परामर्श देने वाली संस्था पेरी ऑडोइन कंसल्टेंट के अध्यक्ष एरिक ईसावे ने कहा कि इंफोसिस, महिन्द्रा, सत्यम, माइंडट्री और एचसीएल जैसी प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियां जर्मनी और फ्रांस में अपने व्यापार को विस्तार देने के लिए स्थानीय सहयोगियों की तलाश कर रही हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र के परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर सुंदरेशन ने कहा कि सॉफ्टवेयर कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में अपना प्रभुत्व बढ़ाया है। इस क्षेत्र में सॉफ्टवेयर क्षेत्र का हिस्सा बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है जबकि संचार और नेटवर्किं ग कंपनियों का हिस्सा घटकर छह प्रतिशत हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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