'ईरान ने अमेरिका से बातचीत के संकेत दिए'

गुरुवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और पी-5 देशों के विदेश मंत्रियों की न्यू यॉर्क में हुई एक बैठक में ईरान से बात चीत दोबारा शुरू करने की नीति पर विचार किया गया. इसकी विस्तार से जानकारी अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने ऑफ दा रिकॉर्ड ब्रिफ़िंग में दी.
इस बैठक में यूरोपिय संघ की प्रतिनिधि केथी ऐश्टन भी उपस्थित थीं जिनकी ज़िम्मेदारी होगी ईरान से दुबारा संपर्क बनाना. संगठन ने यह भी तय किया की वे ईरान पर अपनी एकता बनाए रखेंगे. इस अमरीकी अधिकारी ने कहा की ईरान से ऐसे इशारे मिल रहें हैं की वो बात चीत के लिए तैयार हैं. ये बात चीत कुछ महीनों में शुरू हो सकती है.
पी-5 +1 संगठन की रणनीति पर बोलते हुए अमरीकी विदेश मंत्रालय के इस अधिकारी ने कहा की ईरान से किसी समझौते पर पहुँचने के लिए इसके साथ चरणबद्ध रवैया अपनाना अधिक उचित होगा.
लेकिन इन देशों के विदेश मंत्रियों ने यह भी स्वीकार किया की अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और योरोपिय संघ के ज़रिए ईरान पर लगाए गए आर्थिक और सैनिक प्रतिबंध को पूरी तरह से लागू करना ही काफ़ी नहीं है. उनका कहना था की बात चीत के ज़रिए हल निकालना संगठन का असल मक़सद है.
ईरान के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंध का उस पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है. हाल में ईरान के भूतपूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफ़संजानी ने ईरानी सरकार को प्रतिबंध को गंभीरता से लेने की सलाह दी है.
ईरान ने पिछले साल अक्तूबर में पी-5 +1 देशों से बात चीत शुरू की थी लेकिन बाद में इससे अलग हो गया था. ईरान अब तक इस संगठन के सदस्यों के बीच फूट डालने में कामयाब रहा था जिसके कारण उस पर प्रतिबंधों का ख़ास असर नहीं हुआ था. लेकिन इस बार संगठन के सभी सदस्यों ने प्रतिबंधों का पालन किया है जिससे ईरान को आर्थिक रूप से चोट पहुंची है.
अमरीका और विकसित देशों का कहना है की ईरान की परियोजना परमाणु हथियार बनाने के लिए है लेकिन ईरान कहता है वो परमाणु बिजली घर बना रहा है. ईरान और अमरीका के बीच संबंध कई सालों से टूटे हुए हैं. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद संभालने के बाद ईरान से संबंध दोबारा बहाल करने की दावत दी थी लेकिन ईरान का कहना है कि बात चीत का आधार बराबरी और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए.












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