रक्षा अनुसंधान एजेंसी की नजरें निर्यात पर
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में विकास एवं अनुसंधान के नियंत्रक प्रहलाद ने यहां शुक्रवार को मीडिया के साथ बातचीत के दौरान कहा, "प्रस्तावित व्यावसायिक विभाग हमारी प्रयोगशालाओं के लिए तैयार किए जाने वाले उत्पादों हेतु केवल असैन्य बाजारों पर गौर करेगा, बल्कि यह निर्यात बाजार की संभावना भी तलाशेगा।"
वर्ष 1958 में स्थापित डीआरडीओ के पास 52 प्रयोगशालाएं हैं, जो कि एयरोनाटिक्स, अर्मामेंट्स, इलेक्टॉनिक्स और कंप्यूटर विज्ञान, मानव संसाधन विकास, जीव विज्ञान, मटीरियल्स, मिसाइल, बख्तरबंद वाहनों के विकास और नौ अनुसंधान एवं विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा प्रौद्योगियों के विकास में जुटी हुई हैं।
डीआरडीओ की इन प्रयोगशालाओं में 5,000 से अधिक वैज्ञानिक और 25,000 तकनीकी एवं सहयोगी कर्मचारी कार्यरत हैं।
प्रहलाद ने कहा, "उच्च प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्माण में डीआरडीओ के कार्यक्रमों द्वारा प्रभावित कई सारे देश हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।"
प्रहलाद ने कहा कि मिस्र, इटली, ब्रिटेन और फ्रांस ने डीआरडीओ की परियोजनाओं और उत्पादों में रुचि दिखाई है।
डीआरडीओ ने हाल में दक्षिण कोरिया के साथ पोत निर्माण, इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आटोमोबाइल उद्योग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए दक्षिण कोरिया के साथ एक आपसी सहयोग समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।
भारत ने रूस, इजरायल और फ्रांस के साथ रक्षा परियोजनाओं के संयुक्त उपक्रम भी स्थापित किए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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