नीतीश हार के भय से नहीं रहे चुनाव : विपक्ष
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महामंत्री एवं सांसद रामकृपाल यादव ने नीतीश के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा को हार का डर करार देते हुए कहा कि नीतीश पीछे के दरवाजे से सत्ता पाना चाहते हैं।
इधर, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा का भी कमोबेश यही मानना है। वह कहते हैं कि लड़ाई के पूर्व ही नीतीश मैदान से भाग रहे हैं।
इससे पहले नीतीश ने बुधवार को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ने की क्या आवश्यकता है। वह तो विधान परिषद के सदस्य हैं ही। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा चुनाव लड़ने की नहीं है। हालांकि जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं लड़ना उनकी पार्टी की एक रणनीति का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश अपनी पार्टी के जहां सर्वमान्य नेता हैं वहीं राज्य के कई क्षेत्रों में इनकी पहचान विकास के लिए मिल चुका है। इस पहचान को पार्टी अगामी विधानसभा चुनाव में भुनाना चाहेगी। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि नीतीश अगर खुद चुनाव लड़ेंगे तो वह अपने क्षेत्र में भी व्यस्त हो जाएंगे।
गौरतलब है कि नीतीश पहली बार विधानसभा के लिए वर्ष 1985 में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा में नालंदा और बाढ़ का प्रतिनिधित्व किया। उनके नेतृत्व में नवंबर 2005 में भाजपा-जनता दल (युनाइटेड) गठबंधन राजद की 15 वर्ष पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंकने में सफल हुआ और मुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications