मुफ्त अनाज बांटना व्यावहारिक नहीं : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की सराहना की जिसमें उसने सरकार को गरीबों के बीच मुफ्त अनाज बांटने का आदेश दिया था लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह विचार व्यावहारिक नहीं है।

अपने सरकारी आवास पर संपादकों के साथ चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने सवालिया अंदाज में कहा, "देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले अनुमानित 37 फीसदी लोगों के बीच कैसे मुफ्त अनाज बांटा जा सकता है?"

दरअसल, प्रधानमंत्री से सर्वोच्च न्यायालय के हाल के उस फैसले पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिसमें उसने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को दिए अपने आदेश में कहा था कि सड़ने की बजाए अनाजों को गरीबों में बांट दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अभी तक अदालत के आदेश की प्रति देखी नहीं है लेकिन सभी गरीबों के बीच अनाज बांटना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले के पीछे की भावना का वह सम्मान करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अनाज जब सड़ रहे हों ऐसे में जरूरतमंदों तक उसे पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए हमें एक रास्ता निकालना होगा।

उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को रियायती दर में अनाज मिलना चाहिए। वर्ष 2004 से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के लिए खाद्यान्न की प्रारंभिक कीमतों में हमने कोई वृद्धि नहीं की है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने गरीबों को रियायती दर में अनाज उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराए जाने से किसानों को अधिक से अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। ऐसे में जब अनाज उपलब्ध नहीं होगा तो फिर बांटने के लिए कुछ रहेगा ही नहीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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