मुफ्त अनाज बांटने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोकसभा में हंगामा

अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने इस समस्या का हल तुरंत निकालने के लिए कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। सभी सांसद इस मुद्दे पर भी महज एक दूसरे की टांग खींचने और अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ही ज्यादा इच्छुक दिख रहे हैं। सही भी है जब खुद के पेट 50000 रुपये प्रति महीने की रकम से ठुंसे हुए हों तो खाली पेटों का दर्द और आंसू इन सांसदों को कैसे दिखेगा।
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर किस आधार पर कृषि मंत्री ने न्यायालय के आदेश को सुझाव बताया? उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार इस बात का आश्वासन दे कि खाद्यान्नों को गरीबों में बांटा जाएगा। सरकार को इस काम को पूरा करने के लिए एक सप्ताह में योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।" स्वराज ने लोकसभा में कृषि मंत्री को बुलाए जाने की मांग की।
इस मुद्दे पर जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कहा कि उसके द्वारा जारी किया गया निर्णय आदेश है सुझाव नहीं। सरकार को सूखाग्रस्त इलाकों में अनाज का वितरण करना चाहिए।" बाद में लोकसभा पहुंचे शरद पवार ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। हालांकि उन्होने यह भी दलील दी कि न्यायालय के निर्णय की प्रति उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
इसके बाद लोकसभा में अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने 'खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण द्वारा पीयूए-201 वेरायटी के 40 लाख टन चावल को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर' ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। कौर ने कहा कि खाद्यान्न सड़ रहे हैं जबकि देश में लाखों लोग भूखे हैं। उन्होंने सदन के स दस्यों को याद दिलाया कि नई फसल आने से पहले जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है क्योंकि और चावल रखने के लिए गोदामों में जगह नहीं है। इस मुद्दे पर केद्रींय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के जवाब से असंतुष्ट अकाली दल के सदस्यों के हंगामे के कारण दो बार सदन को स्थगित किया गया।












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