परमाणु दायित्व विधेयक पारित (राउंडअप इंट्रो-1)

केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने परमाणु दायित्व विधेयक को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया।

पांच घंटे से अधिक समय तक चली बहस के दौरान अपने जवाब में चव्हाण ने कहा कि सरकार ने विधेयक पर एक व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा से संबंधित नियामक व्यवस्था की मजबूती के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएंगे और नियम तैयार करते समय सदस्यों के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा।

वामपंथी दलों द्वारा सुझाए गए संशोधनों को ध्वनि मत से नकार दिया गया। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सीताराम येचुरी ने एक संशोधन पर मत विभाजन का सुझाव दिया, जिसे 123 और 23 के अंतर से खारिज कर दिया गया।

उपसभापति के.रहमान खान ने कहा कि संशोधन 123-23 के अंतर से गिर गया है।

ज्ञात हो कि लोकसभा ने 18 संशोधनों के साथ 25 अगस्त को लगभग आमसहमति के साथ विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।

चव्हाण ने कहा कि परमाणु बिजली देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोई रामबाण नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा विकल्प है, जिसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

चव्हाण ने सभी राजनीतिक पार्टियों को आम सहमति पर पहुंचने और मूल विधेयक के 18 संशोधनों को मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "इन 18 संशोधनों ने विधेयक को मजबूत बनाया है, इसे अधिक शक्तिसंपन्न बनाया है।"

उन्होंने कहा कि परमाणु बिजली पैदा करने वाले 30 देशों में से 28 देशों में परमाणु ऊर्जा से संबंधित कोई न कोई असैन्य दायित्व कानून है। चव्हाण ने कहा, "पाकिस्तान के अलावा हम एक मात्र ऐसे देश हैं, जहां इस तरह का कोई कानून नहीं है।"

परमाणु आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व के मुद्दे पर चव्हाण ने कहा कि भारत ने आपूर्तिकर्ताओं पर दायित्व थोपा है। उन्होंने कहा, "हम 28 में से पहले ऐसे देश हैं, जहां हम आपूर्तिकर्ताओं पर कुछ दायित्व थोप रहे हैं। यह आवश्यक है, क्योंकि इस देश ने भोपाल गैस त्रासदी को झेला है।"

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भाजपा विधेयक का समर्थन करती है, क्योंकि उसकी अधिकांश चिंताए 18 संशोधनों में दूर हो गई हैं।

उद्योग जगत की इस आपत्ति पर कि दायित्व के कारण भारतीय परमाणु उद्योग में आपूर्तिकर्ताओं की रुचि नहीं रहेगी, जेटली ने कहा कि यह सब बाजार के चरित्र पर निर्भर है।

जेटली ने कहा, "यह कोई आपूर्तिकर्ताओं का बाजार नहीं है, यह बाजार खरीदारों का है। बाजार का चरित्र आपूर्तिकर्ताओं को आकर्षित करेगा।"

जेटली ने कहा कि मूल विधेयक आपूर्तिकर्ता प्रतिरक्षा विधेय जैसा अधिक था। क्योंकि उसमें दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ता के क्षति पहुंचाने के इरादे का संदर्भ था।

जेटली ने कहा, "लेकिन मुद्दा यह है कि भारतीय करदाताओं को किसी दूसरे की गलती का खामियाजा क्यों भुगतना चाहिए। कोई भी आपूर्तिकर्ता क्षति पहुंचाने के इरादे से उपकरण कभी नहीं बनाएगा। इस तरह यह विधेयक एक तरह से दायित्व मुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।"

माकपा नेता येचुरी ने कहा कि सरकार को परमाणु विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए और भारत को परमाणु ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल शुरू करने से पहले कुछ वर्ष अभी इंतजार करना चाहिए।

येचुरी ने कहा, "कृपया इस पर पुनर्विचार करें। किसी परमाणु दुर्घटना के मामले में संचालकों के लिए दायित्व की एक जमीन होनी चाहिए उसका बोझ नहीं।"

येचुरी ने कहा, "परमाणु विकल्प के लिए कुछ वर्षो तक इंतजार किया जाए। उपेक्षित लोगों को सशक्त बनाने के लिए निवेश करें और उसके बाद परमाणु विकल्प की ओर बढ़ें।"

सदन में उपस्थित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुटकी लेते हुए येचुरी ने कहा कि शायद एक लंबे समय बाद पहला मौका है जब प्रधानमंत्री संसद सत्र के दौरान विदेश दौरे पर नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हम उनकी उपस्थिति से उत्साहित हैं।"

येचुरी ने कहा, "40,000 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा करने में तीन लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस धनराशि का इस्तेमाल 100 बिस्तरों वाले 20,000 अस्पतालों का निर्माण कराया जा सकता है या दो लाख नवोदय विद्यालय खोले जा सकते हैं।"

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी.राजा ने कहा, "दायित्व की राशि बहुत कम है। इसमें पर्याप्त बढ़ोतरी किया जाना चाहिए। किसी आपूर्तिकर्ता के दायित्व में संयंत्र की लागत भी शामिल किया जाना चाहिए।"

इस पर चव्हाण ने कहा, "हमने विधेयक में प्रमुख विपक्षी दल (भारतीय जनता पार्टी) और वामदलों की चिंताओं का ध्यान रखा है।"

उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य परमाणु दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ितों को 'त्वरित' मुआवजा दिलाने का तंत्र विकसित करना है।

उन्होंने कहा, "भाजपा की चिंताओं के मद्देनजर परमाणु हादसे की स्थिति में मुआवजे की राशि 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये कर दी गई है। अमेरिका में भी यही व्यवस्था है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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