फिल्मोत्सव में मदर टेरेसा पर आधारित फिल्म
दस देशों में पांच सालों के दौरान मदर टेरेसा के विभिन्न दृश्यों को कैमरे में कैद कर यह फिल्म बनाई गई है। मदर टेरेसा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 2010 (एमटीआईएफएफ 2010) के नाम से आयोजित इस समारोह में अंग्रेजी व विदेशी भाषाओं की 15 फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
महोत्सव के निदेशक सुनील लुकास कहते हैं, "हमने मदर टेरेसा को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए इस फिल्म महोत्सव का आयोजन किया है। यह महोत्सव प्रेम और शांति के उस संदेश को फैलाएगा जिसके बारे में मदर अपने पूरे जीवन में उपदेश देती रहीं। फिल्मोत्सव के यहां समापन के बाद देश के करीब 100 शहरों और विदेशों में इसका आयोजन होगा।"
'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की सुपीरियर जर्नल सिस्टर प्रेमा ने फिल्म महोत्सव की शुरुआत की।
इस अवसर पर कोलकाता के मुख्य पादरी लुकास सरकार और बरुईपुर के बिशप साल्वाडोर लोबो भी मौजूद थे।
वर्ष 1986 में बनी फिल्म 'मदर टेरेसा' निर्देशक एन और जेनेट पेट्री के पांच साल के काम का परिणाम है। इन सालों के दौरान वे मदर टेरेसा के साथ दुनिया में बेहद तकलीफ से गुजर रहे देशों की यात्रा करते रहे। इनमें युद्धग्रस्त बेरूत, घेराबंदी में फंसे ग्वाटेमाला और कलकत्ता की तंग गलियों की यात्राएं शामिल हैं। फिल्म में मदर टेरेसा को विभिन्न अवसरों पर विभिन्न मनोभावों में दिखाया गया है।
फिल्म महोत्सव में दिखाई जाने वाली अन्य फिल्में गरीबों, निराश्रितों और बीमारों के बीच किए गए मदर टेरेसा के कामों और कोलकाता में उनके अंतिम दिनों पर आधारित हैं।
मदर टेरेसा ने 1950 में 14 वर्ष की उम्र में क्रीक लेन में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की स्थापना की थी लेकिन बाद में 1953 में इसे मदर हाउस में स्थानांतरित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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