सांसद वेतन बढ़ोतरी विधेयक लोकसभा में पेश
इस विधेयक में सांसदों का वेतन 16,000 रुपये से बढ़ा कर 50,000 रुपये कर दिया गया है। संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए तथा संसदीय समितियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दैनिक भत्ते को 1,000 रुपये से बढ़ा कर 2,000 रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा संसदीय क्षेत्र के भत्ते को 20,000 रुपये प्रति माह से बढ़ा कर 45,000 रुपये तथा कार्यालय भत्ते को भी 20,000 रुपये प्रति माह से बढ़ा कर 45,000 रुपये कर दिया गया है।
विधेयक के अनुसार सांसदों का यात्रा भत्ता अब पहले के एक लाख रुपये के बदले चार लाख रुपये होगा।
सांसद वेतन-भत्ता अधिनियम-1954 को संशोधित करने वाला यह विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा और वहां से पारित होने के बाद यह बढ़ोतरी लागू हो जाएगी। बढ़ोतरी मौजूदा 15वीं लोकसभा की शुरुआत से लागू होगी। लिहाजा सांसदों को मई 2009 से बकाए का भुगतान किया जाएगा।
संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने विधेयक को सदन में पेश किया। जबकि बुधवार के लिए सदन की कार्य सूची में यह विधेयक शामिल नहीं था।
ज्ञात हो कि कांग्रेस सदस्य चरणदास महंत के नेतृत्व वाली एक संसदीय समिति ने वेतन में 500 प्रतिशत की बढ़ोतरी की सिफारिश की थी। यानी वेतन को 16,000 रुपये से बढ़ा कर शीर्ष नौकरशाहों के वेतन से एक रुपया अधिक, 80,001 रुपये करने की बात कही गई थी।
लेकिन सरकार ने पांच गुना वृद्धि की मांग खारिज कर दी। परिणामस्वरूप राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लालू प्रसाद और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में कई सांसदों ने तीव्र विरोध दर्ज कराया।
विरोध के बाद सरकार ने करमुक्त सांसद भत्तों में थोड़ी और वृद्धि करने का निर्णय लिया।
इस तरह सांसदों की कुल परिलब्धियों में बढ़ोतरी के कारण वार्षिक खर्च में 103 करोड़ रुपये की वृद्धि हो जाएगी। इसके साथ ही पिछले वर्ष मई से इस वर्ष जुलाई तक के वेतन और पेंशन के बकाया भुगतान पर एक बार में 118 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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