एमपीसीए पर सिंधिया का कब्जा बरकरार
एमपीसीए के इतिहास में यह पहला मौका था जब सर्वसम्मति की बजाय चुनाव हुए। एक तरफ सिंधिया खेमा था तो दूसरी ओर प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का खेमा था। सिंधिया वर्ष 2001 से अध्यक्ष पद काबिज है। इससे पहले उनके पिता माधवराव सिंधिया इस पद की कमान संभाले रहे थे।
यहां रविवार को आम सभा की बैठक में एमपीसीए के कामकाज की समीक्षा की गई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वहीं कैलाश विजयवर्गीय गुट द्वारा एमपीसीए के पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से करने की बजाय चुनाव की इच्छा जताई तो रात एक बजे तक चुनाव प्रक्रिया चली और आखिर में सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय को 72 के मुकाबले 142 वेाट पाकर 70 मतों के अंतर से शिकस्त दी। वहीं चेयरमैन पद पर एम. के. भार्गव, उपाध्यक्ष पद पर विजय नायडू, भगवान दास सुतार व श्रवण गुप्ता, सचिव पद पर नरेंद्र मैमन, कोषाध्यक्ष पद पर वासु गंगवानी,सहसचिव के रूप में अल्पेश शाह व नरेंद्र दुआ, मैनेजिंग कमेंटी के लिए गुलशरे अली, भोलू मेहता, मिलिंद कनमडीकर, व अनिल जोशी चुने गए । यह सभी सिंधिया के पैनल से हैं।
एमपीसीए की बैठक शुरू होने से लेकर चुनाव नतीजे आने तक स्टेडियम के भीतर और बाहर हालात तनावपूर्ण रहे। इसी के चलते भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थे। एक बार तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प तक की नौबत आ गई और पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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