पाकिस्तान को दो अरब डॉलर का कर्ज़

उधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून गुरुवार को महासभा में पिछले हफ़्ते के अपने पाकिस्तान दौरे का विवरण देने वाले हैं. संभावना है कि वे महासभा के सदस्यों से बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए और सहायता देने की अपील करेंगे. पाकिस्तान के बड़े हिस्से में आई बाढ़ से क़रीब दो करोड़ लोग प्रभावित हैं. लाखों मकान ढह गए हैं और लोग बेघरबार हो गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पंजाब और सिंध प्रांत में 40 लाख लोगों के पास पनाह लेने के लिए भी कोई जगह नहीं है जबकि कुल 80 लाख लोगों को तत्काल सहायता की ज़रुरत है. अब प्रशासन के सामने बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने और उनके पुनर्वास की चुनौती है. भीषण बाढ़ से हुए विनाश के बाद सुधार और मरम्मत कार्यों के लिए पाकिस्तान को अरबों डॉलर रुपयों की सहायता की ज़रुरत है और इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से मिलने वाली सहायता और कर्ज़ पर निर्भर है.
विश्व बैंक ने पहले ही 90 करोड़ डॉलर (लगभग 414 करोड़ रुपए) का कर्ज़ देने की घोषणा पहले ही कर दी थी. अब एशियन डवलपमेंट बैंक ने दो अरब डॉलर (लगभग 92 अरब रुपए) के कर्ज़ का प्रस्ताव दिया है. मनीला स्थित बैंक ने अपनी वेबसाइट पर कहा है, "विनाश का आकलन करने में अभी कई हफ़्तों का समय लगेगा लेकिन जो दिखाई दे रहा है वह स्तब्धकारी है." बैंक ने कहा है कि कर्ज़ की राशि अगले दो वर्षों में पाकिस्तान को दी जाएगी.
मध्य और पश्चिम एशिया के लिए बैंक के निदेशक ने कहा है कि दानदाताओं की ओर से आने वाली राशि के वितरण के लिए एक ट्रस्ट फंड की स्थापना की जाएगी. इस बीच गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक विशेष बैठक बुलाई गई है. बैठक में पाकिस्तान में आई बाढ़ की त्रासदी पर चर्चा की जाएगी. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून इस बैठक में अपने पाकिस्तान दौरे का विवरण देंगे और साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से पाकिस्तान की सहायता की अपील करेंगे.
अपनी यात्रा के दौरान बान की मून ने कहा था कि उन्होंने ऐसा विनाश पहले कभी नहीं देखा था. इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के लिए आमतौर पर जो सहायता राशि मिलती रही है उसकी तुलना में पाकिस्तान को बहुत कम सहायता मिल रही है. सहायता एजेंसी ऑक्सफ़ैम ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का आकलन करके कहा है कि इस साल हेती में आए भूकंप और वर्ष 2005 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आए भूकंप को मिली सहायता की तुलना में बाढ़ के लिए सहायता बहुत कम मिल रही है.
कुछ टीकाकारों ने कहा है कि सहायता की कमी की वजह पाकिस्तान की छवि भी हो सकती है, जहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों का ख़ासा प्रभाव है. इस बीच पाकिस्तान में बाढ़ के हालात गंभीर होते जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पंजाब और सिंध प्रांत में कम से कम चालीस लाख लोगों के पास पनाह लेने की कोई जगह नहीं है जबकि कुल 80 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें तुरंत सहायता उपलब्ध करवाने की ज़रुरत है.
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों में से 5 लाख महिलाएँ गर्भवती हैं जिन की देखभाल पर ध्यान दिया जा रहा है. जबकि सिंध सरकार का कहना है कि 10 लाख बाढ़ पीड़ित ऐसे हैं जो विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं. सिंधु नदी ने दक्षिण पंजाब और सिंध के कई और इलाक़ों को नुक़सान पहुँचाया है.












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