मुंबई में पारसियों ने हर्षोल्लास से मनाया नवरोज
पारसी समुदाय के कई सदस्य अपनी पारंपरिक वेश-भूषा में शहर के करीब दो दर्जन पारसी मंदिरों के बाहर प्रार्थना के लिए इकट्ठे हुए। बाद में उन्होंने गले मिलकर एक-दूसरे को बधाई दी और 'नवरोज मुबारक' कहा।
पुणे, लोनावाला, खंडाला, महाबलेश्वर, पंचगनी और राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले पारसियों ने भी उत्साह से अपना नव वर्ष मनाया।
एक हजार साल से भी पहले पर्शिया (वर्तमान ईरान) से भारत आए पारसी समुदाय के ज्यादातर लोग मुंबई और गुजरात में रहते हैं। भारतीय जनसंख्या में पारसियों की हिस्सेदारीो 0.2 प्रतिशत है।
एक अनुमान के मुताबिक देश में पारसी समुदाय के करीब 70,000 लोग हैं और करीब 30,000 लोग दुनियाभर में फैले हुए हैं। यह एक गुजराती-भाषी, शांतिप्रिय और शिक्षित लोगों का समुदाय है।
देश के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ महत्वपूर्ण पारसी लोगों में दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, भीकाजी कामा, दिवंगत जे.आर.डी. टाटा, वैज्ञानिक होमी जे. भाभा, होमी सेथना, फील्ड मार्शल सैम माणिकशॉ, गोदरेज परिवार व कई अन्य शामिल हैं।
वर्तमान में पारसी समुदाय की प्रमुख हस्तियों में भारत के मुख्य न्यायाधीश एस.एच. कपाड़िया, उद्योगपति रतन टाटा, आदि गोदरेज, नुस्ली वाडिया, रूसी मोदी और परवेज दमानिया, कानूनविद् सोली सोराबजी, लेखक सूनी तारापोरवाला और रोहिन्टन मिस्त्री सहित अन्य शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने गुरुवार को पारसी समुदाय को नवरोज की बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उम्मीद जताई कि नवरोज से पारसी समुदाय और पूरे राष्ट्र में खुशियों और समृद्धि की शुरुआत होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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