जीवंत इतिहास बना प्रथम प्रधानमंत्री की राख पर लगा कटहल
तेजपुर (असम), 19 अगस्त (आईएएनएस)। यहां के 155 सैन्य अस्पताल के मरीजों और कर्मचारियों को खाने में जो कटहल दिया जाता है वह कोई मामूली कटहल नहीं है। यह प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की राख पर उगे भारतीय इतिहास का जीवंत उत्पाद है।
गुवाहाटी में सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश कालिया कहते हैं, "हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ख्वाहिश थी कि उनकी राख देशभर में फैला दी जाए।" नेहरू का 27 मई, 1964 को निधन हो गया था।
कालिया ने आईएएनएस को बताया, "उनकी इच्छा के अनुरूप 31 मई, 1964 को उनकी राख का एक पैकेट सेना के 4 कोर मुख्यालय लाया गया था और इस राख को अस्पताल के पुराने स्थान, रिफ्यूजी बाजार में दफन कर दिया गया था।"
उस समय के अस्पताल के कमांडेंट लेफ्टिनेंट कर्नल एस.एन. वान्चू ने तय किया कि कटहल एक सामान्य रूप से पाया जाने वाला फल है इसलिए इसका एक पौधा उस स्थान पर लगा दिया जाए जहां राख को दबाया गया है।
कालिया ने कहा, "उनकी राख यहां लाने के एक साल बाद नौ मई, 1965 को पूरे सैन्य सम्मान के साथ वहां कटहल का एक पौधा रोपा गया।"
कालिया के मुताबिक एक साल बाद अस्पताल की जगह बदली गई और बाकी की सभी चीजों के साथ 'नेहरू मेमोरियल ट्री' को भी नए स्थान पर दोबारा स्थापित किया गया।
उन्होंने कहा, "अस्पताल की नई जगह उसके पुराने स्थान से तीन किलोमीटर दूर थी। हमारे दस्तावेज बताते हैं कि पेड़ को वहां ले जाने में बहुत सावधानी बरती गई। मिट्टी को बहुत गहराई तक खोदा गया ताकि यह पेड़ जिस मिट्टी पर लगा हुआ था उसका एक हिस्सा भी नई जगह पर ले जाया जा सके।"
अब इस 45 वर्ष पुराने पेड़ के फल प्रत्येक गर्मी में अस्पताल के मरीजों, कर्मचारियों, सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों के बीच वितरित किए जाते हैं।
कालिया ने कहा, "इस पेड़ का ऐतिहासिक महत्व बहुत ज्यादा है इसलिए सेना ने उसके आस-पास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण पर भी बहुत ध्यान दिया है। वहां एक पट्टिका लगी हुई है जो पेड़ और उसके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देती है।"
उन्होंने कहा, "ऐसे प्रमाण हैं जो बताते हैं कि पंडित नेहरू की राख के एक हिस्से को एक हेलीकॉप्टर से हिमालय के ऊपर बिखेरा गया था। अन्य स्थानों में से अरुणाचल प्रदेश में भी उनकी राख का हिस्सा ले जाया गया था लेकिन यह पेड़ अनूठा है क्योंकि यह जीवित इतिहास का एक हिस्सा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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