आधारभूत संरचना के लिए कम पड़ेंगे वित्तीय संसाधन : प्रणब

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगली पंचवर्षीय योजना के दौरान इस क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों की कमी 30 प्रतिशत यानी 12.3 लाख करोड़ रुपये तक रह सकती है।

उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए इस क्षेत्र में निवेश का लक्ष्य पूरा हो जाएगा लेकिन अगली पंचवर्षीय योजना में इस क्षेत्र में निवेश के लक्ष्य को पूरा करने में 12 लाख करोड़ रुपये की कमी पड़ सकती है।"

आधिकारिक बयान के मुताबिक संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि आधारभूत संरचना क्षेत्र के लिए वित्तीय साधनों की उपलब्धता बैंकों की देनदारियों और जोखिम पर निर्भर है।

देश की आधारभूत संरचनाओं के लिए वित्त उपलब्धता बड़े पैमाने पर बैंकों पर निर्भर है। देश में बांड बाजार का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाया है। देश के जीडीपी में निजी क्षेत्र के कर्ज का हिस्सा केवल दो प्रतिशत है।

कार्पोरेट बांड बाजार में तेजी आने पर बैकों को काफी मदद मिल सकती है। इससे आधारभूत संरचनाओं के लिए धन उपलब्ध हो सकेगा।

मुखर्जी ने कहा कि विदेशी निवेश आकर्षित करने खासकर कर्ज प्राप्त करने के लिए नियामक सुधारों की आवश्यता है। इससे देश में आधारभूत संरचनाओं के लिए पैसा जुटाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि कार्पोरेट बांड बाजार को मजबूत बनाने और आधारभूत संरचना परियोजनाओं की साख वृद्धि करने वाले तंत्र का विकास करने की जरूरत है।

मुखर्जी ने कहा कि मौजूदा पंचवर्षीय योजना के पहले तीन साल में आधारभूत संरचना क्षेत्र में निवेश लक्ष्य से नौ प्रतिशत ज्यादा रहा है।

इस पंचवर्षीय योजना के पहले तीन वर्षो के लिए आधारभूत संरचना में 9,81,119 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया था। इस दौरान इस क्षेत्र में 10,65,828 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। यह जीडीपी का 7.1 प्रतिशत है और लक्ष्य से 9 प्रतिशत ज्यादा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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