परमाणु संयंत्रों से निजी कंपनियों को दूर रखने की सिफारिश (लीड-1)
बुधवार को हंगामे के बीच दोनों सदनों में पेश की गई समिति की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार या सरकारी कंपनियां ही देश में परमाणु संयंत्रों का संचालन कर सकती हैं।
समिति के सुझावों को स्वीकार किए जाने की स्थिति में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संबंधित विधेयक का समर्थन करने की बात कही है।
कुछ विपक्षी सांसदों ने कहा कि सोहराबुद्दीन शेख हत्या मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस से सौदा होने के कारण भाजपा विधेयक का समर्थन करने को तैयार हुई है।
समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा, "उन्होंने सौदा कर लिया है और सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच से मोदी को बाहर कर दिया गया है।"
शोर शराबे और हंगामे के बीच संसद में पेश की गई रिपोर्ट में स्थाई समिति ने परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की रकम 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र से निजी कंपनियों को दूर रखने की सिफारिश की गई है। इसका अर्थ हुआ कि या तो सरकार या सरकारी कंपनियां ही देश में परमाणु संयंत्रों का संचालन कर सकती हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि गैर संप्रग (संयुक्त प्रगतिशली गठबंधन) और गैर राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) पार्टियां इस मुद्दे को संसद में उठाएंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा ने हाथ मिला लिया है। उन्होंने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में नरम होने का फैसला किया और भाजपा ने विधेयक का समर्थन किया।
इस विवादास्पद विधेयक पर भाजपा और कांग्रेस का गतिरोध अब समाप्त हो गया है। भाजपा ने कहा कि मुआवजे की रकम बढ़ाने और निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति नहीं होने से देश के हितों की सुरक्षा होगी।
संसद के बाहर भाजपा प्रवक्त रविशंकर प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "हम यही चाहते थे। देश के हितों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है और यह केवल सरकार पर भाजपा के दबाव के बाद हुआ।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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