अग्निवेश का नक्सलियों के साथ 72 घंटे के संघर्ष विराम का प्रस्ताव
अग्निवेश ने आईएएनएस से फोन पर कहा, "भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य किशनजी का यह एक बेबाक फैसला है।"
केंद्र सरकार पर नक्सलियों के प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद की दो जुलाई को हत्या का आरोप लगाने वाले अग्निेवश ने कहा कि मंगलवार को दिए गए तीन महीने के संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर नक्सली अधिकारियों से सीधा जवाब चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद भाकपा (माओवादी) के एक पोलित ब्यूरो सदस्य को संघर्ष विराम शुरू करने की तिथि बतानी चाहिए। सरकार को भी उस तिथि से 72 घंटे का युद्धविराम घोषित करना चाहिए।
कुछ महीने पहले तक मरते दम तक लड़ने का संकल्प जताने वाले किशनजी के एक आडियो टेप के माध्यम से मीडिया को शांति वार्ता और तीन महीने के संघर्ष विराम के लिए नक्सलियों के तैयार होने की जानकारी देने के एक दिन बाद अग्निवेश की टिप्पणी सामने आई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से नक्सलियों को वार्ता के लिए कहने के दो दिन बाद नक्सलियों का यह प्रस्ताव सामने आया।
नक्सलियों ने वार्ता में मध्यस्थ के तौर पर अग्निवेश या रेल मंत्री ममता बनर्जी के नाम का प्रस्ताव किया। केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम पहले ही अग्निेवेश को मध्यस्थ की भूमिका निभाने को कह चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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