कश्मीर घाटी में कर्फ्यू और प्रतिबंधों से भरा एक और दिन (लीड-1)
स्थानीय नागरिक रोज-रोज के इन हंगामों से तंग आ गए हैं। पुराने शहर के एक निवासी जुबेर अहमद (38 वर्ष) ने कहा, "यह दिनचर्या बन गई है। जब अलगाववादी प्रदर्शन का आह्वान करते हैं, प्रशासन उसके बदले में कर्फ्यू लगा देता है।"
उन्होंने कहा, "मुझे खिड़की से बाहर जाकर सुरक्षाकर्मियों को देखने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुझे पता है कि अलगाववादियों ने आज बंद आयोजित किया है तो वे अवश्य सड़क पर होंगे।"
उत्तरी कश्मीर के गांदेरबल, हंडवारा और दक्षिणी कश्मीर के शोपियां कस्बे को छोड़कर अधिकारियों ने हर जगह कर्फ्यू लगा दिया है और सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि असामाजिक तत्वों से जान-माल के नुकसान को बचाने के लिए ये उपाय निश्चित तौर पर आवश्यक हैं। अलगाववादी हर बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात करते हैं लेकिन आश्चर्यजनक है कि हर बार ये तथाकथित शांतिपूर्ण प्रदर्शन काफी हिंसक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हिंसा पर लगाम लगाना एकमात्र उपाय है क्योंकि हम नागरिकों का जीवन जोखिम में नहीं डाल सकते। इसलिए गांदेरबल, हंडवारा और शोपियां को छोड़कर हर स्थान पर कर्फ्यू लगाया गया है।
सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले अलगाववादी संगठन हुर्रियत के कट्टरवादी धड़े ने लोगों से धरना देने और शांति प्रदर्शनों के साथ ही बंद रखने का आह्वान किया है।
घाटी के अधिकांश हिस्सों में दुकानें, अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक, डाकखाने और निजी तथा सार्वजनिक यातायात बाधित रहा। घाटी में 11 जून से शुरू अप्रत्याशित हिंसा में अब तक 59 लोगों की मौत हो चुकी है।
श्रीनगर शहर में पैदल और वाहन यातायात रोकने के लिए बुधवार सुबह पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया। कई स्थानों पर झड़पों की भी खबरें हैं।
श्रीनगर के बाहरी इलाके बेमिना में एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी सीआरपीएफ के एक तेज रफ्तार वाहन से टकरा गया। वाहन पर भीड़ पथराव कर रही थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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