मासूमियत खोने के विषय में - प्रधानमंत्री की बेटी की किताब

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपन्यासकार पुत्री, दमन सिंह ने कहा है कि उनकी नई पुस्तक, मासूमियत को खोने और साल-दर-साल बचपन के बदलते अनुभवों के बारे में है। वह कहती है कि निश्चित रूप से वह बचपन में ऐसी नहीं थीं, जैसी कि आज की पीढ़ी के युवक हैं। दमन सिंह का दूसरा उपन्यास 'सैक्रेड ग्रोव' (हार्पर कॉलिन्स-इंडिया) हाल ही में प्रकाशित हुआ है। वह कहती हैं कि इसमें उनके 'बचपन के अनुभव' चित्रित हैं।

दमन सिंह ने कहा, "मुझे लगता है कि एक बच्चे के रूप में मैंने जो जाना, दुनिया में आज के बच्चों का जीवन उससे काफी अलग है।" उन्होंने कहा, "सूचनाओं का विस्फोट, अपार अवसर, प्रौद्योगिकी तक पहुंच : जब मैं युवा थी उस समय इन सबका अनुभव मैं नहीं कर पाई थी।"

दमन सिंह की यह पुस्तक पिछले सप्ताह जारी हुई है। उन्होंने कहा, "लेकिन अब तक बाकी सारी चीजें वैसी ही हैं..जैसे परिवार और दोस्तों के साथ संबंध, किशोरावस्था की भ्रांतियां, बेशर्त प्रेम की नाजुक जरूरत और आदर-भाव। इसलिए 'सैक्रेड ग्रोव' में मेरे बचपन के प्रभाव देखने को मिलेंगे।" उन्होंने कहा कि 'सैक्रेड ग्रोव' में छोटे शहरों के नौकरशाहों की भौतिक और राजनीतिक रूप से जटिल दुनिया में किस तरह मासूमियत समाप्त होती है, उसके बारे में लिखा गया है।

ज्ञात हो कि दमन सिंह ने गुजरात के आनंद में स्थित ग्रामीण प्रबंधन संस्थान में पढ़ाई की है, लेकिन वह फिलहाल पूर्णकालिक लेखिका हैं। वह यहां अपने पति, बेटे और एक कुत्ते के साथ रहती हैं। दमन सिंह मनमोहन सिंह की तीन बेटियों में से दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पिता निश्चित रूप से मेरे पसंदीदा राजनेता हैं। वास्तव में मैं अन्य किसी राजनेता को जानती ही नहीं।" अपनी ताजा पुस्तक के विषय वस्तु के बारे में चर्चा करते हुए दमन सिह ने कहा कि यह निर्विवाद सच है कि इन दिनों मासूमियत की उम्र बहुत छोटी हो गई है।

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