प्रख्यात मराठी कवि नारायण सुर्वे का निधन
उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया था।
जन्म के कुछ दिनों के बाद ही मशहूर कवि सुर्वे के माता-पिता का निधन हो गया था। उन्होंने यह मुकाम अपने दम पर हासिल किया। मुंबई की गलियों में ही उनका जीवन बीता और वह रोजी-रोटी चलाने के लिए दिहाई पर छोटे-मोटे काम करते थे।
वर्ष 1966 में सुर्वे की पहली पुस्तक 'माझे विद्यापीठ' (मेरा विश्वविद्यालय) प्रकाशित हुई थी।
सुर्वे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता भी थे और उन्होंने कई मजदूर संगठनों में भी काम किया। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1998 में पद्म श्री सम्मान से अलंकृत किया गया था।
सुर्वे के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा, "हमने एक महान कवि को खो दिया है, जिसने हमेशा ही आम आदमी का प्रतिधित्व किया।"
उपमुख्यमंत्री छगन भुबल ने अपने शोक संदेश में कहा, "हमने एक महान कवि और सामाजिक कार्यकर्ता खो दिया है जिन्होंने अपनी कविता के माध्यम से निचले तबके की आवाज को उठाया।"
शिवसेना सांसद भरत कुमार राउत ने भी सुर्वे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कविता की शैली अद्भुत थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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