एनएच 22 को चौड़ा करने से पारिस्थितिकी को खतरा
शिमला, 16 अगस्त (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण शिमला-चण्डीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 22 को चौड़ा करने का काम चल रहा है जिससे सड़कें संकरी हो गई हैं और यातायात बहुत कठिन हो गया है।
वहीं दूसरी तरफ पर्यावरणविदों ने सड़क के चौड़ीकरण का विरोध करते हुए कहा है कि इससे यहां की पारिस्थितिकी को खतरा पैदा हो जाएगा।
इस राजमार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले एक यात्री धीरज भाइक ने कहा, "सड़क के चौड़ीकरण के दौरान पर्वतों की कटाई और भारी मशीनों के चलने से सामान्य बारिश होने पर ही भूस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। निर्माण कार्य की वजह से यातायात जाम की समस्या भी पैदा हो रही है।"
उन्होंने कहा कि पर्वतों को काटकर सड़क को और चौड़ा करने से वहां की जमीन और कमजोर होगी जिससे भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि सेबों से लदे भारी ट्रकों की आवाजाही से भी राजमार्ग पर यातायात की समस्या पैदा हो रही है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा 40 किलोमीटर लंबे चण्डीगढ़-शिमला राजमार्ग के चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया है।
परवानू और सोलन के बीच टिंबर ट्रायल होटल के पास पहाड़ियों को काटकर सड़क को और चौड़ा करने का काम चल रहा है।
सहायक पुलिस आयुक्त रमेश पठानिया ने कहा, "भूस्खलन होने पर यातायात के मार्ग में फेरबदल कर कसौली से परवानू की तरफ कर दिया जाएगा। स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।"
उधर, सड़क के चौड़ीकरण के काम पर चिंता व्यक्त करते हुए एक पर्यावरणविद बलजीत मलिक ने कहा, "चट्टानों को विस्फोटों के माध्यम से तोड़कर और पहाड़ियों को काटकर सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। इसे रोका जाना चाहिए नहीं तो यहां 'पारिस्थितिकी आपदा' का खतरा पैदा हो जाएगा।"
मलिक ने बताया कि पिछले तीन दशकों में काफी मेहनत कर पहाड़ियों को मजबूत बनाया गया है। इसके लिए पेड़ लगाए और उनके संरचनाओं को मजबूत बनाया गया है और सरकार एक बार फिर उसे तोड़ना चाहती है जिससे पारिस्थितिकी को खतरा पैदा हो जाएगा।
राज्य के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी पहले कह चुके हैं कि सेब के मौसम के दौरान ट्रकों के गुजरने से होने वाले यातायात जाम से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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