स्वायत्तता से कश्मीर मसले का हल संभव नहीं : महबूबा
जॉर्ज जोसेफ
नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा कश्मीर के नेताओं को किया गया संबोधन एक 'अच्छी शुरुआत' है लेकिन स्वायत्तता पर आधारित प्रस्तावों से 63 वर्ष पुराने कश्मीर मसले का हल नहीं निकल सकता, क्योंकि इसके साथ 'अंतर्राष्ट्रीय स्तर की जटिलता' जुड़ी हुई है।
उनका यह भी मानना है कि भारतीय और पाकिस्तानी कश्मीरियों की 'कदम दर कदम एकता' विभिन्न क्षेत्रों में राह खोल सकती है, क्योंकि जम्मू एवं कश्मीर अनैतिक प्रदर्शनों और मौतों के सिलसिले का साक्षी रहा है।
मुफ्ती ने श्रीनगर से आईएएनएस को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, "हमने पिछले छह दशकों में काफी स्वायत्तता पा ली है। इंदिरा-शेख (अब्दुल्ला) समझौता, राजीव-फरूक (अब्दुल्ला) समझौता जैसी कई संधियां समाधान निकालने में विफल रही हैं। इसलिए पुराने फार्मूले को दोहराने का प्रयास नहीं होना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "इसके अलावा जम्मू एवं कश्मीर के बिगड़े हालात के लिए दूसरे कश्मीर और पाकिस्तान भी जिम्मेदार हैं। इसलिए कह रही हूं कि यह 'अंतर्राष्ट्रीय स्तर का जटिल' मसला है।"
जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में विपक्ष की नेता 51 वर्षीय मुफ्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 10 अगस्त को दिए गए भाषण पर गौर किया जाना चाहिए, 'वरना हालात और बिगड़ जाएंगे।'
उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस नेता अली शाह गिलानी ने 'हालिया हिंसक प्रदर्शन को बंद कर शांति बहाली' की बात कही है, ऐसे में सरकार को सभी पक्षों के विचार पर पहल करनी चाहिए।
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि उन्हें श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा 12 जुलाई को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाग नहीं लेने का अफसोस नहीं है, क्योंकि वह काफी देर से और बेमन से बुलाई गई बैठक थी।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री से गत मंगलवार को मिलने गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होने का भी उन्हें अफसोस नहीं है।
मुफ्ती ने कहा, "दिल्ली में श्रीनगर बैठक के एक माह बाद काफी देर से बैठक बुलाई गई। दूसरी बात कि इसका कोई मायने नहीं था, क्योंकि विभिन्न पार्टियों नेशनल कांफ्रेंस, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेता पहले ही प्रधानमंत्री से मिल चुके थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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