इशरत जहां मौत मामले की जांच एसआईटी के हवाले (लीड-1)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आर.के. राघवन के नेतृत्व में गठित एसआईटी राज्य में 2002 में हुए गोधरा कांड के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े अहम मामलों की जांच कर रही है।

मुंबई कालेज की छात्रा इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई एवं दो अन्य 15 जून 2004 को अहमदाबाद के निकट हुई फर्जी मुठभेड़ में मारे गए थे। यह पुलिस कार्रवाई उप महानिरीक्षक डी.जी. वंजारा के नेतृत्व वाली अपराध शाखा ने की थी। वंजारा सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़े होने के कारण इस समय जेल में हैं।

न्यायमूर्ति जयंत पटेल एवं अभिलाषा कुमारी की खंडपीठ ने गुरुवार को इशरत की मां शमीमा कौसर एवं जावेद शेख के पिता गोपीनाथ पिल्लई की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से इंकार कर दिया।

अगस्त 2009 में अहमदाबाद महानगर दंडाधिकारी की अदालत ने इशरत, जावेद एवं दो अन्य की मौत के मामले को फर्जी मुठभेड़ करार दिया था। इस मामले में पुलिस का कहना था कि ये चारों आतंकवादी संगठन से जुड़े हुए हैं और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या इनका मकसद था।

उच्च न्यायालय ने मामले की जांच एसआईटी को इस शर्त पर सौंपी कि इस मामले में संलिप्त कोई अधिकारी इस जांच दल में शामिल न हो।

अदालत ने कहा कि आदेश को दो हफ्ते के भीतर अमल में लाया जाए तथा एसआईटी तीन महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करे।

खंडपीठ ने 24 जून को जारी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के तहत सुनवाई शुरू की तथा राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें महानगर दंडाधिकारी एस.पी. तमांग द्वारा इस घटना को फर्जी मुठभेड़ करार दिए जाने को चुनौती दी गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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