डूबते जहाज से तेल रिसाव रुका, लेकिन खतरा बरकरार (राउंडअप)

मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। मुंबई बंदरगाह पर एक जहाज से टकराकर क्षतिग्रस्त हुए पनामा के एक जहाज से हो रहे तेल रिसाव के बारे में सोमवार को तो बताया गया कि वह रुक गया है, लेकिन इस हादसे से मुंबई तट से लेकर कोंकण तट तक पर्यावरण को भारी खतरा बना हुआ है।

तटरक्षक ने घोषणा की कि प्रदूषण नियंत्रण प्रतिक्रिया में जुटे जहाजों और विमानों ने शाम को सूचना दी है कि जहाज से तेल रिसाव रुक गया है। लेकिन वे अभी भी हालात पर बराबर नजर रखे हुए हैं। खासतौर से तब से जब शाम को इस बात की पुष्टि हो गई कि विमान पर खतरनाक और ज्वलनशील रसायनों से भरे कंटेनर लदे हुए हैं।

भारतीय तटरक्षक और अन्य एजेंसियां तेल रिसाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। अधिकारियों ने सोमवार को स्वीकार किया कि इस हादसे से पर्यावरण को खतरा बना हुआ है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) ने भी तेल रिसाव रोकने के प्रयासों में अपना हाथ बंटाया है। बीएनएचएस ने मुंबई और रायगढ़ के तटों के सर्वेक्षण के लिए कई टीमें बनाई है।

बीएनएचएस के वैज्ञानिक दीपक आप्टे ने कहा कि तेल रिसाव कई स्थानों पर पाया गया है। रायगढ़ में किहिम, सासवाने, रेवास और मांडवा तट पर तेल रिसाव पाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने इससे इंकार किया है।

आप्टे ने कहा कि वैज्ञानिकों का दल नमूने भी इकट्ठा कर रहा है और बुधवार से नमूनों का विश्लेषण शुरू कर दिया जाएगा।

इधर, मुंबई में तेल के फैलाव की स्थिति का जायजा लेने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल और पर्यावरण मंत्री सुरेश शेट्टी ने सोमवार को प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया।

दुर्घटना के तीसरे दिन लगातार 2,000 लीटर से अधिक तेल समुद्र में फैलता रहा। यद्यपि एक अधिकारी ने कहा कि तेल रिसाव सोमवार देर शाम रुक गया।

इससे एक अन्य गंभीर खतरा जहाज से गिर रहे कंटेनरों को लेकर है। पोत परिवहन के महानिदेशक सतीश अग्निहोत्री के अनुसार लगभग 120 कंटेनर जहाज से समुद्र में गिर चुके हैं।

इन कंटेनरों से मुंबई बंदरगाह और जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह पर आने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा हो गया है और देश के सबसे बड़े और व्यस्त बंदरगाहों पर सभी सामान्य गतिविधियां रुक गई हैं।

हालात को अति गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री चव्हाण ने कहा कि जहाज पर मौजूद तेल को तथा समुद्र में तैर रहे कंटेनरों को तत्काल हटाए जाने की आवश्यकता है। जहाज पर फिलहाल लगभग 2,500 टन तेल मौजूद है।

इसके पहले पर्यावरण मंत्री शेट्टी ने आईएएनएस से कहा था, "स्थिति बहुत गंभीर है और तेल का फैलाव बढ़ रहा है। मैं क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद अगले कदम के बारे में निर्णय लूंगा।"

तेल रिसाव के ठाणे, मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग सहित पूरे कोंकण तट तक फैलने के खतरे को देखते हुए शेट्टी ने सोमवार सुबह विभिन्न विभागों के अधिकारियों से चर्चा की।

मुंबई बंदरगाह के बाहर पनामा के मालवाहक जहाज एमएससी चित्रा और सेंट किट्स के जहाज एमवी खलीजा-3 के बीच तीन दिन पहले टक्कर हुई थी। दक्षिणी मुंबई से करीब पांच किलोमीटर दूर हुई टक्कर के कारण समुद्र में तेल फैल रहा है।

एक अधिकारी ने कहा कि भारत में समुद्र में इस तरह के अब तक के सबसे बड़े अभियान के तहत पांच भारतीय तटरक्षक (आईजीजी) जहाज, एक हेलीकॉप्टर और एक छोटे विमान को लगाया गया है।

दुर्घटना से प्रभावित जहाज एमएससी चित्रा पर करीब 2,600 टन तेल, 300 टन डीजल और 89 टन स्नेहक लदा था।

जहाज खतरनाक तरीके से 70 डिग्री तक झुक गया है और करीब 30 बड़े कंटेनर समुद्र में गिए गए हैं।

इस बीच महाराष्ट्र में 800,000 मछुआरों के मजबूत समुदाय ने सोमवार को मुआवजे की मांग की, क्योंकि तेल रिसाव के कारण उनके कारोबार का भारी नुकसान हुआ है।

तटरक्षक ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) को भी अलर्ट कर दिया है, क्योंकि बीएआरसी अपने दो अनुसंधान अभिक्रियाओं के लिए समुद्र के पानी का इस्तेमाल करता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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