नक्सली हिंसा छोड़ें, वार्ता के लिए बैठें : ममता (लीड-1)

नक्सल प्रभावित क्षेत्र पश्चिम मिदनापुर जिले में आयोजित बड़ी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने वादा किया कि वह स्कूलों का जीर्णोद्धार, अस्पतालों, कालेजों की स्थापना जैसे विकास कार्य कराएंगी तथा रेलवे फैक्टरी स्थापित करवाएंगी, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

उन्होंने कहा, "मैं हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूं, नक्सली कृपया हिंसा छोड़ें, हत्याएं बंद करें। मैं हिंसा में शामिल नक्सली सहित सभी से कह रही हूं कि वे शांति बहाल करने में मदद करें। मेधा जी, स्वामी जी यहां मौजूद हैं। उन्हें नक्सलियों से वार्ता करनी चाहिए और शांति की बहाली सुनिश्चित करनी चाहिए।"

बनर्जी ने कहा कि वह इस पक्ष में नहीं हैं कि शांति की स्थापना राइफलों के इस्तेमाल से हो। उन्होंने पिछले महीने नक्सलियों के प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद को 'मारने' के लिए अपनाए गए तरीके की निंदा की।

संत्रास विरोधी फोरम के तहत आयोजित एक गैर राजनीतिक रैली में बनर्जी ने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।"

नक्सल समर्थक जनजातीय संस्था पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीएपीए) ने इस रैली को समर्थन दिया। इस रैली में अग्निवेश, मेधा पाटकर जैसे सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सल समर्थक लेखिका महाश्वेता देवी एवं अन्य बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

बनर्जी ने कहा, "आइए, हम शांति प्रक्रिया आज से ही शुरू कर दें। बातचीत शुरू करें। बाधाओं एवं भ्रमों को दूर कर बंगाल भारत को राह दिखाए।"

उन्होंने कहा, "हमें बताएं आप कहां बैठना चाहेंगे। हम सभी बैठना चाहते हैं। यदि मेरी मौजूदगी से शांति प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या आए और मुझे इससे अलग रखा जाए तो मैं इसके लिए बुरा नहीं मानूंगी।"

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे सबसे बड़े घटक की नेता बनर्जी ने आजाद की मौत पर शोक जताया।

बनर्जी ने कहा कि नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता के मध्यस्थ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आजाद को वार्ता के लिए तैयार किया था।

अग्निवेश ने आजाद के मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपने संचार माध्यमों का इस्तेमाल करके नक्सली नेता का पता लगाया और उसे मार दिया।

उधर, नक्सलियों का कहना है कि आजाद और एक अन्य कार्यकर्ता हेमचंद्र पांडे को पुलिस ने गत एक जुलाई को नागपुर से उठाया था और अगले दिन आदिलाबाद में मार डाला था। जबकि पुलिस ने दावा किया था कि नक्सलियों के तीसरे नंबर के नेता आजाद की आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मौत हो गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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