मेरी संवेदनशीलता का मजाक न उड़ाएं : प्रणब
लोकसभा में जब विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज सहित कुछ सदस्यों ने कहा कि सरकार निर्दयी और संवेदनहीन है, तो इस पर मुखर्जी ने कहा, "मेरी संवेदनशीलता का मजाक न उड़ाएं। मैं गांव का बच्चा रहा हूं। मैंने 10वीं तक की पढ़ाई मिट्टी के तेल से जलने वाली लालटेन के नीचे बैठकर की है। मैं हर रोज 10 किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल गया हूं। इसलिए मैं गांव के जीवन के बारे में जानता हूं।"
मुखर्जी ने कहा, "हम पर आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार संवेदनशील नहीं है। यदि सरकार संवेदनशील न होती, तो उसने कानूनी अधिनियमन के जरिए अधिकार न मुहैया कराए होते, चाहे वह ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार का अधिकार हो या शिक्षा का अधिकार।"
मुखर्जी ने कहा, "ये सब सरकार की संवेदनशीलता के संकेत हैं। संवदेनशीलता अस्थायी नहीं होनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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