अब्दुल्ला ने कश्मीर के लिए मांगा अतिरिक्त सुरक्षा बल

नई दिल्ली/श्रीगर। पृथ्वी का स्वर्ग माने जाना वाला कश्मीर इन दिनों नफरत की आग में जल रहा है। लेकिन इस बार नफरत की आग फैलाने वाले गैर मुल्की दहशतगर्द नहीं हैं बल्कि कश्मीर घाटी के बाशिंदे खुद हैं। घाटी में शुक्रवार से जारी हिंसा में सोमवार को आठ लोगों मारे गए। इनमें छह लोगों की मौत पुलिस की गोलीबारी से हुई। इसके साथ ही शुक्रवार से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़ कर 22 हो गई है।

पुलिस की गोलीबारी का ताजा शिकार बने प्रदर्शनकारी का नाम रमीज अहमद भट्ट है। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम में शाम को पुलिस ने उस समय भीड़ पर गोलीबारी की, जब भीड़ कर्फ्यू तोड़ने की कोशिश कर रही थी। गोलीबारी में चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

इसके पहले कुलगाम में ही पुलिस की गोलीबारी में आशिक हुसैन भट्ट नामक युवक की मौत हो गई थी। यह युवक चावलगाम गांव का निवासी था। घाटी के ऊपरी बटमालू इलाके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष के दौरान घायल हुए 8 साल के समीर अहमद राह ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस ने समीर की पिटाई की। पुलिस का कहना है कि समीर भगदड़ में घायल हुआ है।

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अन्य पांच मौतें अनंतनाग (2) और पुलवामा (2), कुलगाम(1) व कुपवाड़ा(1) में हुई हैं। जबकि शनिवार को बिजबेहरा कस्बे में घायल हुए एक युवक ने एक अस्पताल में दम तोड़ दिया और आठ वर्षीय बच्चे ने श्रीनगर में दम तोड़ दिया। राज्य में जारी हिंसा के अंतहीन दुष्चक्र को तोड़ने के लिए उपाय ढूंढने की कोशिश करते जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राजनीतिक उपायों के जरिए ही स्थिति पर काबू किया जा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम उठाए जाने के लिए राज्य में सामान्य स्थिति की बहाली आवश्यक है। इसके लिए अब्दुल्ला ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स की मांग की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ करीब दो घंटे तक चर्चा के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक कदम उठाए जाने से पहले केंद्र और राज्य सरकार घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने को लेकर सहमत हैं।

प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा शामिल थे। 24 घंटे के भीतर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की यह दूसरी बैठक थी। सूत्रों ने कहा कि समिति ने अब्दुल्ला को केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही उनसे आग्रह किया है कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ कड़ाई से निपटें और लोगों तक पहुंचने की कोशिश करें।

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