पत्रकार निरुपमा पाठक की मां को जमानत

सुधा की गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की तय अवधि में पुलिस के उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल न कर पाने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई। दिल्ली में एक अखबार के लिए काम करने वाली निरुपमा को उनके घर कोडरमा में रहस्यमय हालातों में मृत पाए जाने के बाद सुधा पाठक को तीन मई को गिरफ्तार कर लिया गया था।
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सुधा पाठक के वकील अरुण मिश्रा ने बताया, "न्यायाधीश एन.के. अग्रवाल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने सोमवार को सुधा पाठक को जमानत दे दी है क्योंकि पुलिस गिरफ्तारी के 90 दिनों के अंदर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी।"
निरुपमा के दिल्ली में रहने वाले मित्र प्रियभांशु रंजन ने उनके परिवार पर इज्जत के नाम पर की गई हत्या का आरोप लगाया था क्योंकि निरुपमा विजातीय विवाह करना चाहती थीं।
जांचकर्ता अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह हत्या का मामला है या आत्महत्या का। फोरेंसिक जांच से पता चला है कि निरुपमा की मौत के बाद मिला सूइसाइड नोट उसी के द्वारा लिखा गया था।












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