महंगाई : विपक्ष का सरकार पर हल्ला बोल (राउंडअप)
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में 'अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का दबाव और आम आदमी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव' संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि यह सरकार संवेदनहीन और विश्वासघाती इसलिए है क्योंकि यह सरकार आम आदमी के नाम पर चुनाव जीतकर आई थी और उसने उन्हीं पर महंगाई का बोझ लाद दिया।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस महंगी होने से सरकार ने आम गृहणी को वापस चूल्हा फूंकने पर ढकेल दिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदाथरें के दामों में की गई वृद्घि केवल बजट घाटे को पूरा करने के लिए की गई है, जिससे सरकार को 33 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी परन्तु इसका बोझ आम आदमी को उठाना पड़ेगा।
सरकार की अनाज वितरण प्रणाली की भी जमकर आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ तो करोड़ों लोग अन्न को तरस रहे हैं, भूखे मर रहे हैं तो दूसरी ओर लाखों टन अनाज सरकारी गोदामों के बाहर सड़ रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का हवाला देते हुए कहा कि वहां 3 लाख 97 हजार अनाज की बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं।
उन्होंने कहा, "हम यदि शुद्घ विपक्ष की राजनीति करें तो इस सरकार के अलोकप्रिय होने से हमें ही फायदा है लेकिन फायदा और नुकसान व्यापार की भाषा है और हम व्यापारी नहीं प्रहरी हैं। महंगाई पर अंकुश लगाना और आम आदमी को राहत देना सबकी नैतिक जिम्मेदारी है।"
सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि देश में कमरतोड़ महंगाई के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, "महंगाई के लिए कोई और नहीं बल्कि यह सरकार जिम्मेदार है। आज देश में 40 से 50 फीसदी लोगों को रोज का भोजन नहीं मिल पाता है। मैं इन्हीं लोगों की भावनाओं को प्रदर्शित करते हुए अपनी बात रख रहा हूं। महंगाई से लोगों का बुरा हाल है।"
मुलायम ने कहा, "वित्त मंत्री (प्रणब मुखर्जी) वित्तीय अनुशासन की बात करते हैं। अगर वित्तीय अनुशासन है तो फिर यह महंगाई क्यों? सरकार कालाबाजारी और फिजूलखर्जी को रोकने में नाकाम रही है। महंगाई को रोकने के लिए कारगर उपाय नहीं किए गए।"
उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का मसला भी उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल को कुछ लोग 'कमाई का खेल' बना रहे हैं और इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
शरद यादव ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल में स्थिति और विकट हुई है। चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा, "संप्रग के दूसरे कार्यकाल में स्थिति और विकट हुई है। सरकार में शामिल लोग इसे जानते हैं, लेकिन कुछ ठोस कदम नहीं उठा पा रहे। ऐसी भी क्या मजबूरी है कि ये लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।"
महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने के साथ ही शरद ने सदन में सत्ता पक्ष के लोगों की भारी अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "हम महंगाई पर चर्चा कर रहे हैं और सदन में हाजिरी बिगड़ी हुई है। प्रणब मुखर्जी भी सदन में नहीं हैं। उन्हें होना चाहिए क्योंकि वह सदन के नेता हैं।"
अनुपस्थिति के संदर्भ में शरद की टिप्पणी पर केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा, "यह जरूरी नहीं है कि सदन में हर वक्त सभी मंत्री मौजूद रहें। जहां जरूरी होगा, उसका जवाब दिया जाएगा।"
शरद ने भ्रष्टाचार और राष्ट्रमंडल खेलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी मामला उठाया। उन्होंने कहा, "आज पूरे में देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाला हो रहा है। सच्चाई यह भी है कि इस घोटाले में शामिल कोई व्यक्ति नहीं पकड़ा जाएगा।"
लालू प्रसाद ने कहा कि देश के नीति निर्माताओं के जमीनी हकीकत से अनभिज्ञ होने के कारण समय रहते आवश्यक उपाय नहीं होने से महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि इंद्र भगवान की कृपा हुई तो महंगाई कम होगी। ऐसे बयानों के प्रभाव से महंगाई और बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि वर्षा होने और निश्चित समय पर वर्षा होने में अंतर है। प्रसाद ने कहा कि अगस्त का महीना शुरू हो चुका है और बिहार तथा उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त वर्षा अभी तक नहीं हुई। इसका असर धान की फसल पर होगा क्योंकि समय से रोपाई नहीं हो पाई है।
लालू ने महंगाई के लिए डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि के साथ ही वायदा कारोबार को भी जिम्मेदार ठहराया। देश के गोदामों में सड़ रही अनाजों का जिक्र करते हुए लालू ने इसके पीछे बड़ा घोटाला होने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि सड़े अनाजों से बीयर बन रहा है और बीयर बनाने के लिए अनाजों को गोदामों में सड़कर सस्ते भाव में बेचा जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों को चीनी की भारी आपूर्ति के कारण उसके दाम बढ़ रहे हैं। गरीबों की पक्षधरता के लिए वाम दलों की सराहना करते हुए लालू ने कहा कि जनता की आवाज को सामने लाने के लिए एक नहीं कई बंद आयोजित किए जाएंगे।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा, "सरकार के पास धन का अभाव नहीं है लेकिन उसने नई उदार नीति अपना ली है और जनता को बाजार के भरोसे छोड़ दिया है।"
उन्होंने कहा, "महंगाई रोकने के लिए वायदा कारोबार पर रोक लगाना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सार्वभौमीकरण और आवश्यक उपभोक्ता वस्तु अधिनियम में संशोधन जरूरी है।"
आचार्य ने महंगाई के लिए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना की और कहा कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की वजह से गरीब जनता महंगाई की मार झेलने को विवश है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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