मप्र में लोक सेवा गारंटी विधेयक विधानसभा में पारित
विधानसभा में शुक्रवार को विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक कदम है। यह दुनिया का पहला ऐसा कानून है, जिसके जरिए लोक सेवाओं के प्रदान करने की गारंटी दी गई है।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में देरी विकास में बाधक है। इसके लिए उन्होंने बाणसागर योजना और बरगी सागर योजना का हवाला दिया, जो तीन और दो दशक बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं। एक तरफ भारत दुनिया का सवरेत्कृष्ट और बड़ा लोकतंत्र है, मगर जब निर्माण कार्य की बात आती है तो, वह 20-20 साल तक पूरे नहीं हो रहे है। निर्माण कार्य समय पर पूरे हों, इसकी जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
चौहान ने कहा कि इस विधेयक के जरिए सेवाओं को प्रदान करने का दायित्व किस अधिकारी पर रहेगा और उसे काम कितने दिन में पूरा करना है, यह अधिसूचना के माध्यम से स्पष्ट हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सेवा में देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर रोजाना 250 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और यह अधिकतम राशि 5000 रुपये होगी। इतना ही नहीं प्रथम अपीलीय अधिकारी बिना पर्याप्त और समुचित कारण के लोक सेवा प्रदान करने में असफल रहता है, तो उस पर न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 5000 रूपये का जुर्माना किया जाएगा।
विपक्षी दल की शंकाओं का निराकरण करते हुए चौहान ने स्पष्ट किया कि विधेयक में इस बात का प्रावधान है कि नागरिक का आवेदन लोक सेवक को न केवल प्राप्त करना होगा, बल्कि उसकी अभिस्वीकृति भी देना होगी।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भविष्य में इस विधेयक के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री सहित अन्य लोगों को लाया जाएगा। पिछली सरकार ने भी सिटीजन चार्टर को अमली जामा पहनाया था,लेकिन उसमें उत्तरदायित्व का प्रावधान नहीं था।
चौहान ने स्पष्ट किया कि लोकसेवकों की जवाबदेही तय करने के लिए इस विधेयक को लाया गया हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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