शोभराज की उम्रकैद की सजा बरकरार (लीड-1)
'द हिमालयन टाइम्स' ने खबर दी है कि न्यायमूर्ति राम कुमार प्रसाद शाह और न्यायमूर्ति गौरी धकाल की खण्डपीठ ने शोभराज को दी गई 20 साल के कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
वर्ष 1975 में सामने आई हत्या की यह घटना संभवत: नेपाल की अब तक की सबसे सनसनीखेज घटना रही है।
दिसंबर 1975 में दो शव बुरी तरह जली हुई अवस्था में काठमांडू घाटी के विभिन्न हिस्सों में पाए गए थे।
एक महिला का शव था, जिसे पहले चाकू से गोद कर हत्या की गई थी, फिर उसे जलाया गया था। उसकी पहचान कोन्नी जो ब्रोंजिक के रूप में हुई थी। उसके पति और पुरुष मित्र की अमेरिका में हिंसक स्थितियों में मौत हो गई थी।
दूसरा शव एक पुरुष का था, जिसकी पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस को संदेह था कि यह शव एक कनाडाई पर्यटक लॉरेंट अर्माड कैरियर का हो सकता था, जो काठमांडू में बोंजिक के साथ ठहरा हुआ था।
पुलिस का कहना है कि शोभराज उसी साल बैंकाक से नेपाल आया था। उसने ब्रोंजिक के साथ दोस्ती की और उसके द्वारा भारत से खरीदे गए कुछ रत्नों के लिए उसकी हत्या कर दी।
शोभराज ने कहा कि वह 2003 के पहले नेपाल कभी नहीं आया था। 2003 में वह एक अधिकृत उद्यमी के रूप में विभिन्न उद्यमों की तलाश में नेपाल आया था। इन उद्यमों में उसकी पेरिस स्थित जेंटलमैन फिल्म्स कंपनी के लिए एक डक्युमेंटरी का निर्माण तथा एक मिनरल वाटर का कारोबार शुरू करना शामिल था।
उसके नेपाल पहुंचने के 16 दिनों बाद 17 सितंबर को एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र ने उसका फोटोग्राफ प्रकाशित किया। उसके बाद पुलिस हरकत में आई और उसने शोभराज को एक जुआ घर से गिरफ्तार कर लिया।
प्रारंभ में पुलिस ने 1975 में शोभराज पर फर्जी पासपोर्ट पर नेपाल आने का आरोप लगाया था। लेकिन अदालत द्वारा उस मामले में उसे बरी कर दिए जाने के बाद पुलिस ने उसे अदालत परिसर से दोबारा गिरफ्तार कर लिया और उस पर ब्रोंजिक की हत्या का आरोप मढ़ दिया।
शोभराज के मामले में लगातार सनसनी पैदा होती रही। इस तरह की खबरें आती रहीं कि वह जेल से फरार होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन शोभराज इससे साफ इंकार करता रहा। और उसके बाद उसने काठमांडू के केंद्रीय कारागार में अपने से उम्र में 40 साल छोटी एक नेपाली महिला से शादी रचाई।
उसके बाद शोभराज के मामले को उसकी पत्नी निहिता बिश्वास की मां, शकुंतला थापा ने अपने हाथों में ले लिया। थापा सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ वकील हैं।
थापा ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि अदालत में एक सेवानिवृत्त डच राजनयिक हरमन निप्पेनबर्ग द्वारा भेजे गए 1,000 से अधिक फर्जी दस्तावेज हैं, जिसे पुलिस ने इंटरपोल द्वारा भेजे गए सबूत के रूप में पेश किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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