मृत्यु के 63 साल बाद घर पहुंची प्रवासी भारतीय की अस्थियां

पूरन जालंधर जिले के उप्पल भूपा गांव के रहने वाले थे। वह एक फेरीवाले का काम करते थे। वह आस्ट्रेलिया में कई चीजों से भरी घोड़ा गाड़ी जगह-जगह ले जाकर सामान बेचते थे। उनका विक्टोरिया प्रांत के वारनाम्बूल में आठ जून 1947 को 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था।

मेलबर्न में 10 जून 1947 को उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था लेकिन अंतिम संस्कार गृह में उनकी अस्थियां सुरक्षित रखी गईं। पूरन की ख्वाहिश थी कि उनकी अस्थियां भारत ले जाकर गंगा में विसर्जित की जाएं। उनकी अस्थियों को सुरक्षित रखने वाले गुयेट परिवार ने तीन पीढ़ियों तक उन्हें तब तक अपने पास रखा जब तक कि पूरन की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकती थी।

आस्ट्रेलिया की विशेष प्रसारण सेवा (एसबीएस) के रेडियो पर जून 2010 में पूरन की कहानी प्रसारित की गई और इसे लोगों की भारी प्रतिक्रियाएं मिलीं। प्रख्यात क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव और ब्रिटेन में रहने वाले पूरन के पोते हरमल उप्पल खासतौर पर उनकी अस्थियां लेने के लिए मेलबर्न पहुंचे।

पूरन की अस्थियों के साथ भारत आईं एबीएस रेडियो की एक प्रतिनिधि मनप्रीत सिंह ने आईएएनएस से कहा, "मैंने अपने इतिहासकार दोस्तों लेन केन्ना और क्रिस्टल जोर्डन से यह अनूठी कहानी सुनी थी। यह अब तक की अद्भुत यात्रा थी।"

उन्होंने कहा, "मेलबर्न में हमारी यात्रा का बहुत स्वागत हुआ और जब हम कल (गुरुवार) अस्थियों के साथ पूरन के गांव पहुंचे तो वहां के लोग बहुत उत्साहित थे। हमने देखा कि पूरन के पूर्वजों के घर का उनके द्वारा भेजे गए पैसे से पुनर्निमाण हो गया है।"

उन्होंने बताया कि घर के बाहर पूरन का नाम भी लिखा हुआ था। मनप्रीत ने बताया कि गुरुवार को पूरन की अस्थियां गंगा में विसर्जित कर दी गईं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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