महंगाई पर तीसरे दिन भी ठप्प रही संसद (राउंडअप)
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने सदन में प्रश्नकाल स्थगित कर नियम 184 के तहत चर्चा की मांग की। जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव और समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने भी उनकी मांग का समर्थन करते हुए तत्काल चर्चा की मांग की।
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में तीखी नोंक-झोंक शुरू हो गई। हंगामा देखते हुए लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर भी विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग पर अड़े रहे। विपक्ष के कई सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए। आखिकार मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले बुधवार को विपक्ष की ओर से दिए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव को मीरा कुमार ने नामंजूर कर दिया था।
उधर, राज्यसभा में भी महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने हंगामा जारी रखा। गुरुवार सुबह राज्यसभा की कार्यवाही आरंभ होने पर विपक्षी सदस्यों ने महंगाई के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की परंतु हंगामा नहीं थमा। इस वजह से उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।
राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष की ओर से नारेबाजी और हंगामा तेज हो गया। इसके बाद उप सभापति के. रहमान खान ने सदन की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी।
संसद में अपनी मांगों को स्वीकार न किए जाने से नाराज विपक्षी दल सड़क पर उतर आए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां राष्ट्रपति के समक्ष गुहार लगाई वहीं वामपंथी और गैर राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) दलों ने संसद भवन परिसर में धरना दिया।
केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए भाजपा नेताओं ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में पार्टी ने राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष महंगाई कम करने के लिए 11 कदम उठाए जाने की मांग रखी।
संसद की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद भाजपा के सभी सांसद और वरिष्ठ नेता इंडिया गेट पर एकत्र हुए और वहां से रैली के रूप में राष्ट्रपति भवन पहुंचे। वहां पर उन्होंने राष्ट्रपति को आठ पृष्ठों का एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के साथ-साथ पार्टी ने राष्ट्रपति को देश भर के 10 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर भी सौंपे। ज्ञापन के मार्फत से राष्ट्रपति से की गई कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं।
1. वायदा बाजार से खाद्य पदार्थो को हटाया जाए।
2. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य भंडारण बढ़ाया जाए।
3. किसान व आम आदमी विरोधी आर्थिक नीतियों पर रोक लगाना।
4. खाद्य वस्तुओं व हरी सब्जियों के दाम करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाना।
5. जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना।
6. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर जोर।
7. कृषि विकास व कृषि संसाधनों को मजबूत करने के लिए कदम उठाना।
8. उचित खाद्य प्रबंधन।
राष्ट्रपति से मिलने गए नेताओं में भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित लगभग सभी सांसद थे।
संसद के दोनो सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद गैर राजग विपक्षी दलों के सदस्य सरकार के खिलाफ इस धरने में शामिल हुए। इसमें माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (सेक्युलर), ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्यों ने हिस्सा लिया।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, "वाम दल और सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां सरकार के खिलाफ एकजुट हुई हैं। यह सरकार महंगाई के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।"
इन विपक्षी दलों ने पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और रसोई गैस की कीमतों में हुई वृद्धि को वापस लेने की मांग की। येचुरी ने कहा, "हम उन नियमों के तहत चर्चा चाहते हैं जिनमें मतदान का भी प्रावधान है। इससे सरकार कुछ ठोस कदम उठाने को विवश होगी।"
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा, "यह सरकार वोटों के लिए कीमतों को घटाती है और सत्ता में आते ही उसे वापस ले लेती है। वर्ष 1977 (आपातकाल) की तरह आज पूरा विपक्ष एकजुट है। मुझे खुशी है कि वाम दलों ने भी गांधीवादी विचारधारा को स्वीकार किया है।"
भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा, "हम संसद को बाधित नहीं करना चाहते क्योंकि बहुत सारे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं लेकिन इस समय कीमतों में वृद्धि का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है।"
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने भी पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि को वापस लेने की मांग की। दूसरी ओर से समाजवादी पार्टी (सपा) ने संसद भवन के मुख्य द्वारा पर अलग से प्रदर्शन किया।
विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन और हंगामे पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि संसद के भीतर नारेबाजी करने से कीमतों में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित करना चाहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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