श्रीलंका में पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ सुनवाई शुरू
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार फोन्सेका ने कहा था कि पिछले साल रक्षा सचिव ने संघर्ष खत्म होने के समय आत्मसमर्पण करने वाले तमिल विद्रोहियों को खत्म करने का आदेश दिया था।
सुनवाई के पहले दिन अदालत ने एक समाचार पत्र के संपादक सहित 20 गवाहों को सम्मन जारी किया। गवाहों को अदालत में 27 सितंबर को पेश होना है।
उल्लेखनीय है कि समाचार पत्र 'संडे लीडर' में छपे एक साक्षात्कार में फोन्सेका ने दावा किया था कि रक्षा सचिव गोताभ्या राजपक्षे ने सेना के एक ब्रिगेडियर से कहा था कि 'लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम '(लिट्टे) के सफेद झंडे के साथ समर्पण करने वाले सदस्यों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
रक्षा सचिव राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा है कि फोन्सेका की प्रकाशित टिप्पणी जनता को सरकार के खिलाफ भड़काने और आपातकालीन नियमों का उल्लंघन करने वाली है।
यह टिप्पणी मई 2009 में विद्रोहियों से संघर्ष के दौरान हुए कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आकर्षित करने के संकेत थे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून की सलाह पर जून में एक समिति का गठन किया गया था, जो नियम के उल्लंघन में गिरफ्तार फोन्सेका के मामले की जांच करेगा।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक देश के पूर्वोत्तर हिस्से में लिट्टे से संघर्ष के दौरान 7,500 नागरिक मारे गए थे। इसी दौरान लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरन भी मारा गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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