बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है 'पेंटावैलेंट' टीका
बेंगलुरू, 29 जुलाई (आईएएनएस)। टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने भारत में जिस 'पेंटावैलेंट' (एक ही टीके में पांच टीके) टीके की अनुशंसा की है वास्तव में उससे श्रीलंका और भूटान में बच्चों की मौतें हो रही हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) के नए अंक में प्रकाशित हुए एक लेख में यह चेतावनी दी गई है।
इस रिपोर्ट में बाल रोग विशेषज्ञों, प्रोफेसरों, स्वास्थ्य कायकर्ताओं और एक पूर्व भारतीय स्वास्थ्य सचिव ने इस टीके के इस्तेमाल के प्रति चिंता जताई है। इसमें एक ही टीके में डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटेनस (डीपीटी), हेपाटाइटिस बी और हीमोफिल्स इंफ्लुएंजा टाइप बी (एचआईबी) के प्रतिजन होते हैं।
दिल्ली स्थित सेंट स्टीफेंस हॉस्पिटल के चिकित्सक व इस लेख के लेखक जैकब पुलियेल ने आईएएनएस से कहा, "हमारा लेख बताता है कि श्रीलंका में हुई मौतों के लिए इस टीके को जिम्मेदार न बताने के लिए किस तरह से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रतिकूल प्रभावों के वर्गीकरण का अपना मापदंड बदल दिया है।"
इस लेख में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के.बी. सक्सेना, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य के प्रोफेसर देबाबर बनर्जी, इमरान कदीर और ऋतु प्रिया, 'ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क' के सह-संयोजक मीरा शिवा और गोपाल दाबाडे और वित्त मंत्रालय में पूर्व सलाहकार एन.जे. कुरियन ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं।
लेख में कहा गया है कि अफ्रीका में 'पेंटावैलेंट' टीके के इस्तेमाल के पांच मौतों सहित 25 गंभीर मामले सामने आने के बाद अप्रैल 2008 में वहां इस पर रोक लग गई। भूटान में जुलाई 2009 में इस टीके का इस्तेमाल शुरू हुआ था लेकिन आठ मौतें होने के कारण दो महीने बाद ही इस पर रोक लगा दी गई।
भूटान अब तक डब्ल्यूएचओ के इस टीकाकरण को दोबारा शुरू करने के लिए बनाए जा रहे दबाव का विरोध कर रहा है जबकि श्रीलंका में इस साल से इसका इस्तेमाल फिर शुरू हो गया है। डब्ल्यूएचओ की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि अफ्रीका में हुई मौतों का कारण यह टीका नहीं था।
इसी जर्नल में प्रकाशित हुए एक अन्य लेख के मुताबिक पाकिस्तान में इससे तीन बच्चों की मौत हो चुकी है।
विशेषज्ञों की राय है कि 'पेंटावैलेंट' टीके से होने वाली मौतों को देखते हुए इसके इस्तेमाल से पहले इसकी पूरी जांच आवश्यक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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