अगवा पायलट को बचाने के लिए कांगो से मदद मांगी (लीड-2)
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में स्थित भारतीय दूतावास, कांगो विद्रोहियों द्वारा शनिवार को अगवा किए गए भारतीय पायलट की सुरक्षित रिहाई के लिए कांगो सरकार के बराबर संपर्क में है। पायलट का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है।
एक निजी विमानन कंपनी के साथ सह पायलट के रूप में कार्यरत सैयद मजहर को रानदन विद्रोहियों ने एक दूरवर्ती इलाके में स्थित हवाई अड्डे पर हमला कर अगवा कर लिया था। यह हवाईअड्डा देश के उत्तर कीवु प्रांत में वलिकाले के उत्तर लगभग 25 किलोमीटर दूर किटाम्बे में स्थित है।
विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, "किनशासा स्थित हमारा दूतावास सैयद मजहर की सुरक्षित रिहाई के लिए डीआरसी के संबंधित अधिकारियों से बराबर संपर्क में है। डीआरसी के अधिकारियों ने हमें आश्वस्त किया है कि वे इसके लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।"
सूत्रों ने कहा कि कांगोली सेना के जनरल बैगवा दीउडोने अमुली ने हमले के लिए रानदन हुतु एफडीएलआर विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है।
रूसी मीडिया के अनुसार विमान का रूसी पायलट विद्रोहियों की नजरों से बच कर विमान में ही छुप गया था। उसने विमान को चालू कर दिया और नजदीकी शहर गोमा भाग निकला। विमान में सवार एक कांगोली नागरिक हमले के दौरान घायल हो गया था।
मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "हम सैयद मजहर की सुरक्षित वापसी के लिए पूरा प्रयास करेंगे।"
विमान नार्थ कीव की राजधानी गोमा के लिए लौटने वाला था, इसके पहले ही उसे लूट लिया गया। यह विमान गोमा एक्सप्रेस का था।
ज्ञात हो कि डीआरसी सरकार के साथ भारत का अच्छा रिश्ता है। डीआरसी के राष्ट्रपति जोसेफ काबिला ने भारत-अफ्रीका फोरम के लिए वर्ष 2008 में भारत का दौरा किया था।
डीआरसी के विदेश मंत्री अलेक्सिस थाम्बवे मवाम्बा के अक्टूबर 2009 में भारत दौरे के दौरान नई दिल्ली ने कांगो के लिए ऋण की सीमा 26.30 करोड़ डॉलर बढ़ा दिया था।
मीडिया रिपोर्टों में गोमा एक्सप्रेस के निदेशक प्रेडो कादोगी के हवाले से कहा गया है कि विमान में धन के अलावा खाद्यान्न भी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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