फीफा पर सट्टा लगाने वाले हज़ारों गिरफ़्तार

सबसे अधिक गिरफ़्तारियाँ चीन और थाईलैंड में हुई हैं. जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनके बारे में कहा गया है कि वे संगठित अपराध संगठन से जुड़े हुए हैं. सोगो-3 के नाम से एक महीने से अधिक समय चलाए गए इस अभियान आठ सौ से अधिक सट्टेबाज़ी के अड्डों की पहचान की गई और वहाँ छापे मारे गए.
कहा गया है कि इन अड्डों में 15.5 करोड़ डॉलर के सट्टेबाज़ी हुई. सोगा अभियान की शुरुआत सुदूर पूर्व में सट्टेबाज़ी का मेला लगने की ख़बर के बाद 11 जून से हुई थी, ठीक उसी दिन से जिस दिन विश्वकप फ़ुटबॉल प्रतियोगिता शुरु हुई थी. फ़्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित इंटरपोल के मुख्यालय से यह कार्रवाई शुरु हुई और इसके लिए चीन, हॉन्गकॉन्ग, मकाउ, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के अधिकारियों का सहयोग लिया गया.
अधिकारियों ने एक करोड़ डॉलर के अलावा कारें, बैंक कार्ड्स, कंप्यूटर और मोबाइल ज़ब्त किए हैं. जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनके संबंध संगठित अपराध गिरोहों के अलावा काले धन को सफेद करने वाले और वेश्यावृत्ति में लगे संगठनों से पाए गए हैं. इंटरपोल के कार्यकारी निदेशक ने कहा है कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर कोई अभियान चलाया गया.
इंटरपोल का कहना है कि ज़्यादातर सट्टेबाज़ी या तो ऑनलाइन हुई या फिर टेलीफ़ोन के ज़रिए. अभी यह नहीं कहा गया है कि इतने व्यापक पैमाने पर हो रही सट्टेबाज़ी की वजह से क्या मैदान में खेल या किसी मैच का परिणाम प्रभावित हुआ. अधिकारियों का कहना है कि यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि इस सट्टेबाज़ी की वजह से कोई मैच फ़िक्सिंग हुई या फिर किसी खिलाड़ी का खेल प्रभावित हुआ क्योंकि यह और बड़े जाँच का विषय है.
इससे पहले फ़ुटबॉल में सट्टेबाज़ी किसी टीम को मिलने वाले पहले कॉर्नर शॉट या फिर पहली बुकिंग आदि पर होती रही है क्योंकि यह 22 खिलाड़ियों वाले खेल के मैच फ़िक्सिंग की तुलना में बहुत आसान रही है.












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