खेल प्रेमियों के लिए चंबल घाटी में रोमांचक पर्यटन
आगरा, 17 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आए पर्यटक अगर पूर्व डाकुओं से बात करने की इच्छा रखते हों या घुमावदार पहाड़ी में सैर करना चाहते हों तो चंबल घाटी इसके लिए अनुकूल जगह होगी।
मध्य प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और एक निजी कंपनी, चंबल सफारी के सहयोग से, राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सैलानियों को भिंड जिले में स्थित चंबल घाटी में आकर्षित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। एक सयम यह इलाका भारत के सबसे डरावने डाकुओं का अड्डा हुआ करता था।
इस कार्यक्रम का नाम 'चंबल चैलेंज' रखा गया है। यह कार्यक्रम राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 11-17 अक्टूबर तक चलेगा।
मध्य प्रदेश में पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पर्यटकों को भिंड जिले में मोटर बोट के जरिए अटेर किले तक ले जाया जाएगा और वे वहां से चंबल घाटी की हरे-भरे नजारों का आनंद ले सकते हैं।
एक अधिकारी ने बताया, "अगर पर्यटक चाहें तो जंगल में तम्बू में रात भी बिता सकते हैं।"
सैलानी, पूर्व दस्युओं से केवल बातचीत ही नहीं कर सकते, बल्कि उनके लोकसंगीत, जैसे अल्हा और लंगुरिया शैली की गायकी का भी आनंद ले सकते हैं। पर्यटन विभाग पूरे भिंड में इसे लेकर प्रचार करने की योजना बना रहा है।
चंबल घाटी में कुछ साल पहले लोकप्रिय सफारी अभियान शुरू करने वाले राम प्रताप सिंह ने आईएएनएस से बताया कि अटेर किला लगभग 800 साल पुराना है। भोपाल क्षेत्र में यह पहला किला है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के भोपाल सर्किल ने संरक्षण के लिए अपने अधीन लिया था।
सिंह ने बताया, "एएसआई ने पिछले 10 सालों में शानदार काम किया है और मेरा मानना है कि खतरनाक डाकुओं से प्रभावित रहा यह चंबल 10 साल बाद एक खूबसूरत पर्यटन स्थल बन जाएगा।"
सिंह के अनुसार चंबल का दौरा सैलानियों के लिए रोमांचक होगा और उन्हें बेहतरीन अनुभव देगा। क्योंकि यहां की तरह घड़ियाल, पक्षियां और डरावनी घाटियां कहीं और नहीं मिलेंगी।
भिंड जिला प्रशासन पर्यटकों को चंबल घाटी में पहुंचाने के लिए अनुकूल अधोसंरचना पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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