भारत-पाकिस्तान बातचीत जारी रखेंगे, कड़वाहट कम करेंगे (राउंडअप)

नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 17 जुलाई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री स्तर की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच दो दिनों तक चली बयानबाजी के बाद भारत और पाकिस्तान ने शनिवार को मतभेदों को कम करने की कोशिश की। दोनों देशों ने कहा कि वार्ता टूटी नहीं है और संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बातचीत जारी रहेगी।

दोनों देशों ने हालांकि उस व्यापक धारणा को नकारने की कोशिश की कि 15 जुलाई की बातचीत एक गतिरोध में समाप्त हो गई, लेकिन ऐसा लगा कि इसके साथ दोनों पक्षों ने अपनी प्रमुख चिंताओं को भी दोहराया। जहां पाकिस्तानी नेताओं ने कहा कि सभी मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए, वहीं भारत ने कहा कि वह क्रमिक और सीमित दृष्टिकोण को महत्व देता है।

भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव ने जोर देकर कहा कि वार्ता टूटी नहीं है और संवाद प्रक्रिया हर हाल में जारी रहेगी। लेकिन यहीं पर उन्होंने पाकिस्तान से यह आत्मविश्लेषण करने के लिए कहा कि आखिर भारत के खिलाफ आतंकी मशीनरी का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

राव ने एनडीटीवी के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मैं यह कहने के लिए मजबूर हूं कि वहां राज्यीय और गैर राज्यीय ताकतें हैं और पाकिस्तान को आत्ममंथन की पूरी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता है, खासतौर से यह समझने के लिए कि आखिर आतंकवाद खुद पाकिस्तान के ताने-बाने के लिए अब क्यों खतरा बन रहा है।"

राव ने कहा कि दोनों पक्षों ने अविश्वास को कम करने के लिए संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न विचारों पर चर्चा की है। उन्होंने कहा, "सोच में फर्क है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच इतनी चौड़ी खाई नहीं है, जिसे पाटा न जा सके।"

राव ने कहा, "दोनों पक्षों की उम्मीदों के बीच एक दूरी है और हमारे पास करने के लिए एक बहुत ही स्पष्ट बात थी, वह यह कि हम सोचते थे कि हम पाकिस्तान के साथ चर्चा करेंगे। लेकिन पाकिस्तान थोड़ी अलग उम्मीद के साथ आया। मैं सोचती हूं कि पाकिस्तान का मकसद था कि समग्र संवाद की प्रक्रिया बहाल की जाए।"

दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी शनिवार को अपना रवैया नरम करते हुए कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और वार्ता को जारी रखने के लिए गंभीर है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भारतीय प्रधानमंत्री को एक सम्मानित व्यक्ति बताते हुए कहा, "पाकिस्तान भारत के साथ वार्ता को जारी रखना चाहता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुझे आश्वस्त किया कि सभी मुद्दों पर चर्चा होगी।"

लहौर में एक समारोह से इतर उन्होंने कहा, "हम बात करना चाहते हैं, वे (भारत) बात करना चाहता है। जब बात हो रही है, हम सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस समय मैं नहीं कह सकता कि क्या होने वाला है।"

भूटान की राजधानी थिम्पू में अप्रैल में आयोजित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के शिखर सम्मेलन के दौरान मनमोहन सिंह से हुई अपनी मुलाकात का हवाला देते हुए गिलानी ने कहा, " उन्होंने मुझे आश्वस्त किया कि दोनों देशों के बीच के सभी मुद्दों पर चर्चा होगी।"

दोनों नेताओं ने अपने विदेश सचिवों और विदेश मंत्रियों को बैठक करने और आपसी विश्वास को बहाल करने के उपाय करने का निर्देश दिया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के बीच वार्ता गुरुवार को गतिरोध के साथ समाप्त हुई। पाकिस्तान ने जम्मू एवं कश्मीर में मानव अधिकारों का मामला उठाया और भारत ने 26/11 के मुंबई हमले के जिम्मेदार लोगों पर समय सीमा के भीतर कार्रवाई पर जोर दिया।

भारत के खिलाफ एक दिन पहले कड़ी टिप्पणी करने वाले कुरैशी ने शनिवार को कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए पाकिस्तान गंभीर है और वार्ता को जारी रखने का फैसला अच्छा संकेत है।

कुरैशी ने भी कहा, "पाकिस्तान, भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध सामान्य बनाने के लिए बेहद गंभीर है। एक दिन पहले मैंने भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात की। हम दोनों बातचीत लगातार जारी रखने पर सहमत हुए। वार्ता जारी रखने का फैसला अच्छा संकेत है।"

इधर नई दिल्ली में राव ने स्पष्ट किया कि भारत, अपने खिलाफ जारी आतंकवाद में राज्यीय ताकतों - पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई)- की भूमिका को लेकर लगातार चिंतित है।

राव ने कहा, "आतंकवाद में राज्यीय ताकतों की भूमिका को लेकर हम वाकई चिंतित हैं।"

ज्ञात हो कि पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने भारतीय जांचकर्ताओं के समक्ष खुलासा किया था कि मुंबई हमले में लश्कर-ए-तैयबा के अलावा आईएसआई सहित पाकिस्तानी एजेंसियां भी शामिल थीं।

दूसरी ओर कुरैशी ने कहा, "लंबे समय से पाकिस्तान और भारत संघर्षरत हैं। आपसी संबंधों को सामान्य बनाने के उद्देश्य से आपसी हितों और बराबरी के आधार पर सभी द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करने का यह सबसे उचित समय है।"

इससे पहले शुक्रवार को कुरैशी ने दावा किया था कि कृष्णा को बातचीत के दौरान बार-बार नई दिल्ली से हिदायतें मिल रही थीं इसीलिए विचार-विमर्श ठीक से नहीं हो सका। उधर कृष्णा ने पाकिस्तान के इन आरोपों को गलत बताया था कि भारत सभी मसलों पर वार्ता का इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सभी ज्वलंत और ठोस मुद्दों पर वार्ता को तैयार है।

इस बीच पाकिस्तान के समाचार पत्र 'द न्यूज' के अनुसार शुक्रवार को ही इस्लामाबाद में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर संतोष जाहिर करते हुए भारत के साथ वार्ता जारी रखने पर सहमति जाहिर की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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