श्रीलंका में तमिलों के पुनर्वास का मूल्यांकन चाहते हैं करुणानिधि

शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे एक पत्र में करुणानिधि ने कहा, "मैं यह सुझाव देना चाहता हूं कि भारत सरकार अपने कूटनीतिक स्रोतों के जरिए अथवा विशेष दूत भेजकर श्रीलंका में विस्थापित तमिलों के पुनर्वास कार्य की वास्तविक स्थिति का पता लगाए।"

उन्होंने कहा कि भारत सरकार पुनर्वास कार्य पूर्ण करने की अवधि और प्रभावित लोगों की संतुष्टि के बारे में भी जानकारी लेने का प्रयास कर सकती है। इससे भविष्य में तमिलों के लिए शांति एवं अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।"

इससे पहले 9 जुलाई को प्रधानमंत्री ने करुणानिधि को लिखे एक पत्र में उनसे श्रीलंका में जातीय संघर्ष मिटाने और सामंजस्य बढ़ाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उनके विचार और सुझाव मांगे थे।

डीएमके द्वारा 1956 से अब तक श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों का समर्थन करने की बात को रेखांकित करते हुए करुणानिधि ने कहा कि इस मुद्दे पर अल्प और दीर्घ अवधि के समाधान निकालने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, "यद्यपि भारत सरकार ने तमिलों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़ रुपये का अनुदान दिया लेकिन यह दुखद है कि इसके बावजूद इस काम में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।"

पत्र में कहा गया कि विस्थापित हुए लोग शिविरों में लगातार पीड़ा झेल रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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