मानसून की बेरुखी से राजस्थान सूखे की चपेट में

विजय शर्मा

जयपुर, 17 जुलाई(आईएएनएस)। मानसून की बेरुखी से राजस्थान में गंभीर हालात पैदा होते जा रहे हैं। नहरों के सूख जाने से राजधानी जयपुर सहित अधिकतर जिलों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। पानी के अभाव में किसान खरीफ की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। सूखे जैसे हालात से राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

राज्य के अजमेर, भीलवाड़ा, ब्यावर और पाली जैसे शहरों में हफ्ते में चार से छह दिन ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। पश्चिमी जिलों में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है।

जयपुर में पानी आपूर्ति का प्रमुख स्रोत मानी जाने वाली जमवा रामगढ़ नहर पूरी तरह सूख गई है। करोड़ों रुपये की लागत से सालभर पहले शुरू हुई बीसलपुर बांध पेयजल योजना भी जवाब दे गई। शनिवार रात से इस बांध से जयपुर को की जा रही पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। दो दिन से शहर की बाहरी कालोनियांे के लोगों को मुश्किल से पानी नसीब हो पा रहा है।

एक प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार जयपुर शहर के तीन बड़े रिहायशी इलाकों में हजारों लोगों के समक्ष पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार अब जलापूर्ति की आपात योजना पर काम कर रही है।

शुक्रवार दोपहर से बीसलपुर बांध से होने वाली 160 लाख लीटर पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके अलावा बीसलपुर बांध से जयपुर शहर में पानी की आपूर्ति करने के लिए सूरजपुरा में बनाए पंप हाउस के पंप को भी बंद कर दिया गया।

राज्य के जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव रामलुभाया का कहना है कि मानसून की बेरुखी के कारण राज्य में पानी की कमी पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने पूर्व में बनाई गई आपात योजना को 31 जुलाई तक जारी रखने का फैसला किया है। जिन शहरों में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं, वहां रेल और दूसरे साधनों से पानी मुहैया कराया जा रहा है।

राज्य के अजमेर, भीलवाड़ा, ब्यावर और पाली जैसे शहरों में हफ्ते में चार से छह दिन ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। पश्चिमी जिलों में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है।

मानसून की बेरुखी से राज्य के किसान भी आहत हैं। बारिश की आस में वे अभी खरीफ की बुवाई करने से कतरा रहे हैं। कृषि विभाग की सूचना के अनुसार बारिश नहीं होने के कारण राज्य में 15 जुलाई तक महज 47 प्रतिशत क्षेत्र में ही खरीफ की बुवाई हो सकी है।

जयपुर जिले के चाकसू गांव के नाथूलाल बैरवा का कहना है कि इस बार इस मौसम में खेत बंजर पड़े हैं और इलाके के ज्यादातर परिवार रोजगार की तलाश में दूसरे स्थानों पर जा रहे हैं। जालौर, बाड़मेर, पाली और उदयपुर संभाग के कई गांवों के लोग हरियाणा और पंजाब चले गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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