वैशाली में बसते हैं 'फादर टेरेसा'
वैशाली जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर पटेढ़ी बेलसर प्रखंड के चकावाजा गांव में प्रद्युम्न कुमार लोक सेवा आश्रम, जनकल्याण समिति केन्द्र के बैनर तले अनाथ बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा-दीक्षा का कार्य बिना किसी सरकारी सहायता से करने में जीजान से लगे हैं।
इस कार्य के कारण आस-पास के लोग प्रद्युम्न को जहां 'फादर टेरेसा' कहते हैं वहीं आश्रम में रहने वाले बच्चे उन्हें 'पापा' कहते हैं।
प्रद्युम्न ने आईएएनएस को बताया कि वर्ष 1972 में वे पटना गए थे और वहीं एक अनाथ बच्चे को सड़क पर तड़पते देखा। उसकी तबियत खराब थी। उसे अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। तभी से उन्होंने अनाथ बच्चों की परवरिश करने तथा उन्हें शिक्षा देने की ठान ली।
वह कहते हैं कि प्रारंभ में उन्हें इस कार्य में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा, यहां तक कि अपने परिजनों से भी ताने सुनने पड़े। परंतु अब इस कार्य में उनकी पत्नी समेत पूरा परिवार लगा हुआ है।
प्रारंभ में यह आश्रम छोटे झोपड़ीनुमा मकान में प्रारंभ किया गया था और उस समय 11 अनाथ बच्चे थे। इसके लिए उन्होंने रेलगाड़ियों, बस अड्डों में भीख तक मांगी। परंतु अपने धुन के पक्के 55 वर्षीय प्रद्युम्न ने एक बार जो ठान लिया उसे अब तक पूरा करते चले जा रहे हैं।
प्रद्युम्न कहते हैं कि आश्रम में सातवें तक की शिक्षा इन बच्चों को दे दी जाती है फिर उनका अन्य विद्यालयों में नामांकन करवाया जाता है। वहां के बाद इन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल बनाया जाता है।
वह बताते हैं कि वर्तमान समय में इस आश्रम में 40 से ज्यादा बच्चे हैं जबकि इस आश्रम से करीब 4,000 से ज्यादा बच्चे निकलकर राज्य तथा देश के विभिन्न कोनों में अपने पैरों पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस आश्रम में कुछ गरीब तबके के लोगों के भी बच्चे हैं। वे इस क्षेत्र में दो-तीन महीने में चिकित्सकों को बुलाकर स्वास्थ्य शिविर भी लगवाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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